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चोर पुलिस
Date : October 19, 2015, 8:36:12 PM
Languages : Hindi
PageView : 0000109155
Categoreies : New Updated Stories
चोर पुलिस
Chor Police

राजीव और प्रशांत दोनों बेतहाशा भागते हुये एक सरकारी मकान के अहाते में कूद पड़े। दोनों की सांसें धौंकनी के समान चल रही थी। फिर भी वे भागते हुये घर के पिछवाड़े में आ गये। मकान में अन्दर की ओर खुलता हुआ एक दरवाजा था। दोनों दबे पांव अन्दर आ गये। अन्दर का दरवाजा भी खुला हुआ था।

राजीव ने कमरे में झांक कर देखा। टीवी चल रहा था पर कमरे में कोई नहीं था। तभी उनके कानों में बाथरूम से किसी औरत के गुनगुनाने की आवाज आई। दोनों ने इशारा किया और राजीव पलंग के नीचे सरक गया। तभी घर के से बाहर पुलिस सीटी बजाती हुई निकली।

रात गहराने लगी थी। प्रशांत ने खिड़की से झांक कर बाहर देखा। पुलिस के साये अंधेरे में दूर जाते हुये नजर आ रहे थे। प्रशांत भी कमरे के एक कोने में दुबक गया। तभी बाथरूम का दरवाजा खुला। राजीव के सामने दो नंगे पांव नजर आ रहे थे। उसे किसी जवान लड़की के होने का संकेत मिला।

तभी रिवॉल्वर की नाल पलंग के नीचे दिखी,"तुम जो भी हो बाहर आ जाओ, वर्ना गोली मार दूंगी !"

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राजीव की रूह तक कांप गई। वह चुपचाप पलंग के नीचे से निकल आया। सामने एक बेहद सुन्दर सी जवान लड़की रिवॉल्वर लिये खड़ी थी। एक तौलिया उसके वक्ष के उभारों से लिपटा हुआ कूल्हों तक था। वो कुछ और कहती उसके पहले ही पीछे से प्रशांत ने लपक कर उसकी रिवॉल्वर छीन ली। उसके शरीर पर लपेटा हुआ तौलिया अचानक ही ढीला हो गया और नीचे गिरने लगा। राजीव ने लपक कर तौलिया पकड़ लिया और उसे फिर से लपेट दिया।

"राजीव, गिरने दे तौलिया.... जवान जिस्म है .... जरा मजा तो लें !"

युवती घबरा सी गई, तौलिया सम्भालते हुये भी उसने नीचे गिरा दिया। उसका चमकीला नंगा बदन ट्यूब लाईट की रोशनी दमक उठा । दोनों के बदन झनझना उठे।

उसे देखते ही दोनों की आखों में वहशत भरी एक चमक आ गई। प्रशांत ने तो उसे पीछे से पकड़ ही लिया। उसका लण्ड कड़क होने लगा था। राजीव भी इस हुस्न के आक्रमण को नहीं झेल पाया और सामने से वो उससे लिपट गया। पहले तो वो लड़की छटपटाई, पर कुछ भी नहीं कर पाने अवस्था में उसने अपने आप को दोनों के हवाले कर दिया।

"बस.... मुझे नोचो मत .... जो करना है प्यार से करो, आखिर मैं भी तो एक इन्सान हूँ!" युवती के मुख से एक कराह सी निकली। दोनों को अपनी इस जानवरों जैसी हरकत पर शरम आने लगी।

"सॉरी, आपको नंगा देख कर हमारा बांध टूट गया था।"

"आओ, जो करना हो बिस्तर पर करो.... पर तुम दोनों भाग क्यूँ रहे हो....?" अचानक युवती का स्वर बदल सा गया। उसके कोमल स्वर में अब वासना का पुट आ चुका था।

राजीव जरा नाजुक दिल का था सो सहानुभूति से उसकी रुलाई फ़ूट पड़ी...."हमारी गर्ल फ़्रेण्ड ने हमें घर पर रात को बुलाया था। पर उसी के सामने वाले फ़्लेट में एक खून हो गया था। पुलिस छान बीन कर रही थी तो हम डर गये।

पीछे की खिड़की से कूद कर हम भाग निकले और ये पुलिस वाले हमें ही कसूरवार मान कर पीछे पड़ गये !"

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"मेरा नाम मनीषा है.... तुम यहाँ बिल्कुल सुरक्षित हो.... अब चुप हो जाओ.... जो हुआ उसे भूल जाओ !" मनीषा ने उसे अपने पास लेटाते हुये चूम लिया।

"पर यह मत सोच लेना कि आप बच गई.... आपको चोदना तो है ही....!" प्रशांत बोल पड़ा।

"है तेरी हिम्मत .... बड़ा आया चोदने वाला !" मनीषा ने आंखे तरेरते हुये उसे जोश दिलाया।

"क्या.... साली को देख तो.... अभी बताता हूँ .... !"कह कर प्रशांत ने उसे अपनी तरफ़ घुमाया और उसे दबोच लिया। वो एक बेबस चिड़िया की तरह फ़ड़फ़ड़ाने लगी। तभी दोनों के मोटे लण्ड उसके सामने आ गये।

"ले दबा इसे, दो दो मस्त लण्ड हैं !" मनीषा ने दोनों के मोटे मोटे लण्ड थाम लिये और मुठ मारने लगी। दोनों ही झूम उठे।

"चला हाथ मस्ती से साली.... हां ये बात हुई ना .... !"

मनीषा बड़े यत्न से और मस्ती से मुठ पर हाथ चलाने लगी।

"अब मुँह से चूस ले और जोर से चूसना....!"

मनीषा ने उनके लण्ड जम कर चूसना चालू कर दिया। कभी प्रशांत का लण्ड चूसती और कभी राजीव का लण्ड। दोनों के चूतड़ हिलने लगे और लग रहा था कि वे मनीषा का मुख चोद रहे हो।

तभी उसे अपनी गांड में लण्ड को छूने का अहसास हुआ।

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"प्रशांत, मार दे गाण्ड साली की .... मै चूत सम्हालता हूं...." मनीषा दोनों के बीच में सेण्डविच हो गई थी। उसने भी अपने आप को एडजस्ट किया और अपनी टांगे चौड़ा दी। मनीषा मन ही मन उनसे चुदाने की तैयारी कर चुकी थी। पर थोड़ा बहुत नाटक तो करना था ना। दो दो लण्ड उसके शरीर की सतह पर तड़प रहे थे, उसके जिस्म में यहा वहां ठोकरे मार रहे थे। उसकी चुदाई की इच्छा बढ़ती जा रही थी।

"तुम दोनों एक बेबस लड़की के साथ यह सब रहे हो .... देखना मैं उसकी सजा जरूर दूंगी.... आह्ह !"

प्रशांत का लण्ड मनीषा की चूत में घुस चुका था.... उधर राजीव का लण्ड भी उसकी गाण्ड में घुसने की कोशिश कर रहा था। जब उसकी चूत में लण्ड घुस गया तो मनीषा ने अपनी गाण्ड ढीली की। छेद को ढीला करते ही राजीव का लण्ड अन्दर घुस गया।

मनीषा का मन हरा हो गया। उसने आनंद भरी एक सीत्कार भरी। उसके दोनों छोर पर लण्ड घुस चुके थे। वो एक करवट पर लेटी अपने चूतड़ हल्के से हिलाने लगी।

"आह हा .... उह्ह्ह्.... साली चूत हिला हिला कर चुदा रही है और मजे ले रही है....

अब तो हमें गाली तो मत दे...."

"ऊईईईईई.... मेरे जिस्म में दो दो लण्ड गाड़ कर मुझे मस्त कर दिया है.... तो दिल तो आपको धन्यवाद तो देगा ही ना .... साले प्रशांत चोद जरा मस्ती से.... लगना चाहिये कि मर्द मिला है.... आईईई राजीव.... तू क्या मेरी गाण्ड फ़ाड़ ही डालेगा.... चल लगा तू भी जरा मस्त हो कर...."

दोनों के लण्ड जोर मारने लगे और मनीषा चुदने लगी.... मनीषा दोनों तरफ़ से एक साथ कभी कभी नहीं चुदी थी। यह पहला अनुभव था.... उसे लगने लगा था कि काश शादी भी दो मर्दों से होने चाहिये.... वर्ना चुदाई का क्या मजा ?

"राजीव , अब मुझे इसकी गाण्ड चोदने दे.... तू इसकी चूत मार .... !" प्रशांत ने प्रस्ताव रखा। राजीव तुरन्त मान गया और पोजिशन बदलने लगे। इतने में उसका दरवाजा किसी ने खटखटाया।

"कौन है....?" मनीषा ने खीज कर कहा।

"मैडम, सरदार सुरजीत सिंह, हेड कांस्टेबल रिपोर्टिंग....! " प्रशांत ने तुरन्त लपक कर रिवाल्वर उठा ली....

"तो आप भी पुलिस है.... देखो मेरे हाथ में रिवॉल्वर है, उसे रवाना कर दो वर्ना....।"

मनीषा मुस्कराई और दरवाजे की ओर चल दी। उसने अपना गाउन पहना और तौलिया सर पर बांधा.... तीन पुलिस वाले थे। तीनों पुलिस वालों ने उसे सैल्यूट मारा।

"क्या है?"

"मैडम ध्यान रखें.... दो कातिल इधर ही भाग कर आये हैं.... सावधान रहना....!"

"ठीक है, अब जाओ...." उसने दरवाजा बंद कर दिया।

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राजीव और प्रशांत दोनों सावधान हो चुके थे। अन्दर आते हुई बोली,"चलो क्या हुआ लण्ड ढीले हो गये ?" वो हंसते हुई बोली। दोनों ही वहाँ से जाने की तैयारी करने लगे।

"अभी मत जाओ, बाहर पुलिस तुम्हें ढूंढ रही है।"

"बाहर भी पुलिस और अन्दर भी पुलिस.... सॉरी मैडम.... हमारे पास रिवाल्वर नहीं होती तो हम अन्दर ही होते !"

" वो तो मैं चाहती तो सब कुछ कर सकती थी....!"

"ओये चुप हो जा.... इसी रिवाल्वर से तेरी गाण्ड में गोली नहीं उतार देता...." प्रशांत कुछ विचलित सा होता हुआ बोला।

"खाली रिवाल्वर से गोलियाँ नहीं चला करती हैं जानी....!" अब प्रशांत के चौंकने की बारी थी। उसने तुरन्त रिवाल्वर चेक की और उसने विस्मित नजरों से मनीषा को देखा। मनीषा के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी।

"अब कपड़े उतार ही दो .... "मनीषा ने दोनों के लम्बे लम्बे हाथ से लण्ड पकड़ लिये, और दबाते हुये बोली,"अब मुझे वैसे ही चोदो जैसे पहले चोद रहे थे.... देखो पूरा मजा देना !"

"आपने हमें जानबूझ के बचाया.... जब कि हमने आपको जानवरों की तरह चोदा....!"

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"मुझे पता था कि तुम बेकसूर हो, हमें मालूम हो चुका कि किसने वो सब किया था.... फिर जानवरों की तरह चुदाने मुझे जो मजा आया है .... उसका भी धन्यवाद !"

दोनों के लण्ड एक बार फिर से कड़क हो उठे।

"देखो, एक बार फिर से मुझे जानवरों की तरह से चोद डालो....!" एक बार फिर से दोनों के लण्ड उसके शरीर से चिपक गये और मनीषा फिर से सेंडविच बन गई। वह आह भरने लगी। दोनों के लण्ड आगे व पीछे के दरवाजे पर दस्तक देने लगे। कुछ ही क्षणों में मनीषा के जिस्म में दो गरम गरम मूसल घुस पड़े। उसके चूतड़ बीच में दब गये और दोनों दोस्त अपना अपना काम करने लगे। मनीषा ने दोनों को सहूलियत देने के लिये अपनी एक टांग कुर्सी पर उठा कर ऊंची कर दी और गाण्ड का द्वार ढीला कर दिया। लण्ड सीधे ही छेद को चीरता हुआ भीतर चला गया।

उधर प्रशांत का लण्ड भी चिकनी चूत में सरक गया । मनीषा दोनों लण्ड के घर्षण से मचल उठी। लगा, शरीर में दो साण्ड आपस में भिड़ गये हो।

"भेन के लौड़ो.... चलाओ अपना लौड़ा.... फ़ोड़ दे साली गाण्ड को.... !" मनीषा अपनी पुलीसिया भाषा पर उतर आई थी। दोनों के लण्ड फ़ूल कर फ़ड़फ़ड़ा रहे थे। दोनों की कमर तेजी से चलने लगी थी। डबल चुदाई से मनीषा मदहोश होने लगी थी। कभी कभी प्रशांत और राजीव दोनों ही हाथ बढ़ा कर एक दूसरे के चूतड़ दबा कर अपनी तरफ़ खींच लेते थे। इससे दोनों के लण्ड एक साथ पूरी गहराई में उतर जाते थे और मनीषा मस्ती में लहक जाती थी। राजीव ने पीछे हटते हुये दीवार का सहारा ले लिया और अब मनीषा के पीछे जोर लगाने पर राजीव का लण्ड गाण्ड की जड़ तक बैठ जाता था।

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दोनों मनीषा से ऐसे लिपटे हुये थे मानो एक वृक्ष हो और दो लतायें.... बेतहाशा मनीषा को चूमे जा रहे थे। चूंचियो की हालत दबा दबा कर, मरोड़ मरोड़ कर खराब कर दी थी। निपलों को मसल उसे बेहाल कर दिया था। तभी मनीषा चीख उठी, उसका शरीर कड़क सा हो गया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

"मर गई रे हरामजादो .... अब हटो.... हाय रे.... अब तो फ़ट ही जायेगी...." उसका सीत्कार सुन कर दोनों को होश में आ गये और राजीव ने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा और वीर्य उछाल मारता हुआ बाहर कूद पड़ा। पहली और दूसरी धार तो मनीषा के चूतड़ों पर गिरी, बाकी बूंद बूंद करके जमीन पर गिरने लगी। उधर प्रशांत भी अपने सुहाने पलों के नजदीक पहुंच गया था और फिर मनीषा को दबाते हुये अपना लण्ड चूतड़ बाहर खींचते हुये निकाल लिया और आह भरते हुये वीर्य निकालने के लिये जोर लगाने लगा। राजीव ने तुरन्त उसका लण्ड पकड़ा और मुठ मारने लगा। प्रशांत मनीषा से लिपट पड़ा और आखिर उसने अपना वीर्य पिचकारी की तरह छोड़ना चालू कर दिया। राजीव ने उसका वीर्य निकालने में पूरी सहायता की।

प्रशांत और राजीव बिस्तर पर आ कर बैठ गये और सुस्ताने लगे.... जब कि मनीषा तरोताजा लग रही थी। दोनों ने अपने अपने कपड़े उठाये और पहनने लगे। मनीषा ने यह देख कर उन्हें ललकारा,"बस मेरे जवानो .... थक गये क्या.... जवानी का मजाक मत बनाओ.... साले.... नामर्दों.... !"

दोनों ने उसे आश्चर्य से देखा.... और दोनों ने आंखों ही आंखों में इशारा किया और मनीषा को झपट कर बिस्तर पर लेटा दिया।

"क्या कहा.... नामर्द .... थक गये हैं .... तेरी तो मां चोदी.... देख अब तेरा क्या हाल करते हैं...."

मनीषा खिलखिला कर हंस पड़ी...." देखा मस्त चुदना हो तो नामर्दी की बात कह दो .... फिर देखो चुदाई का मजा.... अरे मेरे नमूनो, बाहर पुलिस होगी, रात भर यहीं रहो, मुझे चोदो और जश्न मनाओ.... दारू पीते हो....? चलो दो दो पेग लगाओ और चालू हो जाओ !"

ये सुनते ही दोनों ने उसे छोड़ा और दारू पीने बैठ गये। मनीषा राजीव की गोदी में लण्ड के ऊपर दोनों पांव इधर उधर करके कमर में लपेट कर बिस्तर पर बैठ गई।

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अब राजीव के खड़े का लण्ड का दबाव सामने उसकी चूत पर पड़ रहा था। मनीषा को उसका लण्ड अपनी चूत में सरकाने में कोई परेशानी नहीं आई। बड़ी शान्ति से उसका लण्ड सरकता हुआ उसकी चूत में बैठ गया। प्रशांत को पता तक नहीं चला कि मनीषा की चुदाई फिर चालू हो चुकी थी। वो दारू पीने में मस्त था। राजीव भी गिलास से एक एक घूण्ट हलक से नीचे उतारता और अपने चूतड़ो को हल्के से ऊपर नीचे करके एक शॉट मार देता.... मनीषा भी धीरे धीरे एक एक घूंट लेती और मस्ती से राजीव से चिपक जाती.... माहौल धीरे धीरे फिर से गर्म होने लगा था। मनीषा की गाण्ड भी चुदने को तैयार थी.... दो जवान लण्ड उसे चोदने का फिर से यत्न करने लगे थे....

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