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शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 1 )
Date : June 20, 2015, 11:52:27 PM
Languages : Hindi
PageView : 000017108
Categoreies : Hindi Long Sex Stories
शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 1 )

Shaadishudaa Aurat Ki Kahani - Part 1

उसकी शादी 18 साल की उम्र में कविता से हो गयी थी. कविता दूर एक गाव का था और किसान था, जो आपने बाप और छोटा भाई रणजीत के साथ रहता था. मा चल बस्सी थी. कविता के अंकल ने उसकी शादी 19 साल की उमर में ही करवा दिया क्यूंके घर में एक औरात की सख़्त ज़रूरात थी जो घर के काम काज कर सके और घर संभाल सके. कविता एक बहुत अजीब तरह का लड़का था जो क़िस्सी से कभी बात वाघहैरा नहीं कराता था और आपने आप में गुम, खामोश खोया रहता था. और उसको एक किस्म की नुरलॉजिकल प्राब्लम था. दिमाघ के अंदर के नस्सों में कुछ गड़बड़ था. कभी कभी एक दौड़ा जेसा पड़ता था मगर बिलकूल ख़तरे वाले बात नहीं थी. जब उसको क़िस्सी मुश्किल का सामना करना पड़ता था तो उसस्के हाथ और उग्लियान थरथराने लगते थे और साथ में उसका सर भी हिल्लने लगता था और उसस्के पसीने चूत्ते थे. उससे वो रोग आनुवांशिक रूप से आपनी मा द्वारा विरासत में मिली थी. उसकी पत्नी (बहू) का नाम था मेनिका. वो बेशक कविता से बहुत ज़ियादा हूशियार थी. वो पढ़ी लिखी थी. मेनिका के अंकल ने रविड्रा से उसकी शादी करने को इस लिए राज़ी हुए क्यूंके कविता के अंकल के पास बहुत सारे ज़म्में थे जिसस में गन्ने की कल्टिवेशन होते थे, और उसस्के पास एक 4जे4 भी था, मतलब मेनिका के प्रतीक () के पास; और वह आमिर लोग थे हालान के किसान थे. अब किसान किया तकरीबन 500 किसान कविता के अंकल के लिए काम करते थे खेत में.

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शादी की पहली रात के बाद वाली सूबह को, कविता के तरफ के महिला रिश्तेदार उन्न के बिस्तर की चादर को चेक करने के लिए गये, क्यूंके वहाँ एक परंपरा की तरह फॉलो किया जाता था सुहाग रात की पहली सूबह को दुल्हन की बिस्तर की सफेद चादर देखा जाता था के यूयेसेस पर खून है या नहीं. खून दुल्हन की वर्जिनिटी साहबित कराता था. सदियों से यूयेसेस गाव में एसा ही चला आता था. और अगर दुल्हन वर्जिन होते तो चादर पर खून के ढाबे दिखाई देते. हर नयी नवालेी दुल्हन को भी इस बात का पता होता था के सुहाग रात की सूबह को चादर देखने फॅमिली के औरातें आते हेँ. अब क्यूंके कविता की मा नहीं थी तो रिश्तेदारों में जो भी औरातें थे उन्हू ने यह काम किया सूबह को.

कविता के अंकल पहले से ही दुविधा में थे यह सोचकर के पता नहीं कविता ने सुहाग रात सही से माना पाया या नहीं क्यूंके उसको तो पता था के उसका बेटा एसे मौकोन पर थरथराने लगता है और आपने आप में खुद को बंद कर लेता है. अंकल को ड्ऱ था के औरातें कहीं कमरे से वापस आकर यह ना कहें के खून नहीं है चादर पर. कविता के अंकल ने याद किया के जिसस दिन मेनिका को पहली बार देखने के लिए उसस्के गाव ले गया था कविता को, तो किस तरह से कविता काँपने लगा था जब मेनिका उसको कॉफी सर्व करनने आई थी. अंकल को और रिश्तेदारों को कविता की रोग के बड़े में पता था, मगर सब यही कहते थे के एक बार उसकी शादी हो जाएगी तो रोग घायब हो जाएगा. सब का यही ख़याल था के शादी के बाद उसकी थरातर्री , कंपन, पसीने का चूटतना सब ख़त्म हो जाएगा.

सूबह को उसस्के कमरे से औरातें वापस आए तो पता चला के उन्न के बिस्तर के चादर पर कहीं एक कटरा खून भी नहीं दिखाई दिया.

बाद में पूच ताज के बाद पता चला के प्रविड्रा ने सेक्स ही नहीं किया मेनिका के साथ, उसने मेनिका से पीठ कर के सोया रात भर.

औरातों ने मेनिका से बात किए. सब ने मेनिका को समझाया के आपने पाती को रिझाना चाहिए उसको आपने तरफ खिंचना चाहिए वाघहैरा…..

खैर, दिन गुज़राते गये मगर कुछ भाई नहीं हुआ कविता और मेनिका के बेडरूम में. सुहाग रात अब भी बाकी था. एक हफ्ते बाद कविता के अंकल खुद बिस्तर चेक करने जाता था जब मेनिका नहाने चली जाती थी तब. यह काम कविता की एक फूपी ने सोम्पा था उसको और कहा था जिसस दिन खून दिखे उसको खबर करने को ताके वो रस्मों को पूरा करने के लिया कुछ औरातों को लेकर आएगी.

अब छोटे भाई रणजीत को सब पता था के किया माजेरा है, उसको पता था के उसस्के बड़ा भाई ने सुहाग रात नहीं मनाई है हालान के एक हफ़्ता गुज़र गया था. अब रणजीत यूयेसेस सिचुयेशन को सोचते हुए आपने दिमाघ में गंदे ख़यालात पालने लगे थे. खुद से कहता रहता, “काश मुझको ही एक रात के लिए भाई बुला ले आपने बेडरूम में तो भाबी की चादर को मैं ही लाल कार्दुन और भाई करीडिट ले जाए काश एसा हो सकता.” रणजीत भी 18 साल का था बिलकूल आपनी भाबी मेनिका का हुमुमर.

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मेनिका एक बहुत ही खूबसूरात लड़की थी. ना ज़ियादा पतली, ना मोटी, पतली कमर, फिगर बिलकूल कमला कीट ही, गोरा रंग, जान लेवा मुस्कुराहट, यूयेसेस से भी जीयादा कातिलाना एँखहें, आवाज़ तो एसी के कानों में शहेड घुल जाए. कोई भी मर्द यूयेसेस पर जाअँ निसार कर दे, एसी थी मेनिका. उसकी अड़ाएं बहुत अट्रॅक्टिव थी. उसको रिझाना आता था और वो बहुत सेडक्टिव और सेनुयल दिखती थी. उसस्के होंठ और एँखहें जेसे इन्विटेशन दे रहे हू! उसस्के ब्रेस्ट्स बहुत ही नाप तौल कर जेसे बनाया गया हो, ना ज़ियादा बड़ा और ना ही छोटा जिससे देख कर कोई भी मर्द उसस्के तरफ खिन्नचा जाता हालान के कपड़े के अंदर ही क्यूँ ना हो! मेनिका का जिस्म भी जेसे उपर वाले ने बड़े फ़ुर्सत से बनाए हो, उसकी कमर, गान्ड, पीठ, गला, सब कुछ जिस्म के हर एक हिस्सा जान लेवा था. 18 साल की उमर की एसी जवान थी वो जिसस में एक बच्ची और एक औरात भी नज़र आते थे. जब वो चाहती थी तो एक कूम उमर की बची की तरह पेश आती वरना एक औरात की तरह दिखती.

रणजीत की बहुत ही जल्द मेनिका से अच्छी दोस्ती हो गयी और दोनों में छेद छानी भी शुरू हो गयी घर में. दोनों एक दूसरे से ओपन्ली छेद छानी करते! आपने अंकल और कविता के हाज़िरी में भी. हाथों से भी एक दूसरे को माराते, कभी रणजीत मेनिका का बाल खिंचता या मेनिका कभी मुति बाँध करके कविता को मार्टी. यह सब अंकल और बड़े भाई कविता के सामने भी होता था. उन्न दोनों को यूयेसेस तरह से छेद छानी करते देख कर कविता सोचता के दोनों भाई और बहें की तरह खेलते हेँ और अंकल भी उससी नज़र से दोनों को देखता था.

मगर कविता के अंकल को इस बात का बाहोट चिंता हो रहा था के नयी बहू घर में आ तो गयी मगर अभी तक कुँवारी बैठी है. दूसरा हफ़्ता हो गया था. वो हर सूबह उन्न दोनो के कमरे में जाता और चादर चेक कराता मगर क़िस्सी भी दिन खून की कोई निशान नहीं मिलता उसे. इस तरह धीरे धीरे एक महीना गुज़र गया. उधर से बाकी के औरात रिश्तेदार कविता के अंकल को हर रोज़ खेत में यूयेसेस बड़े में बात करते यहाँ तक के कविता के अंकल तंग आगेया और खुद मेनिका से बात करने का फ़ैसला किया!

तो एक रात को एक मौके का फएदा उठा कर कविता के अंकल ने मेनिका से कविता को रिझाने को कहा. आपने तरीके से उसने मेनिका से कहा के वो कविता के करीब जाए, उसको करेस करें, चूमें…. उसस्के जिस्म पर आपना हाथ फेरररें .. वाघहैरा…. मेनिका को प्रतीक से एसे बातें सुनकर बहुत ही शरम आई और उसका चेहरा एसा लाल हुआ जेसे अब खून तपाक पड़ेंगे उसस्स्के गालों से! मगर मेनिका समझती थी और उसे पाता था के उसको एक प्राब्लम सॉल्व करना है और बहुत ज़ियादा दिन गुज़र चुके हेँ. वो समझती थी के उसका प्रतीक उससी के भलाई के लिए सब कुछ कहा यूयेसेस से.

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दिन, हफ्ते, महीने गुज़राते गये और रणजीत मेनिका को तारक भरे नज़रों से देखने लगा और उसको आपने बिस्तर पर लेटाने को सोचने लगा… जब भी मेनिका नहाने के लिए जाती तो कविता का छोटा भाई, रणजीत आपनी भाभी को क़िस्सी ना क़िस्सी तारह से झाँकने जाता. आपने अंकल को बाहर जाने का हमेशा रणजीत इंतेज़ार कराता और जल्दी से मेनिका की कंपनी में वक़्त गुज़ाराता वो. और एक दिन रणजीत ने बहुत हिमत करके आपनी मेनिका भाभी को पीछे से आपने बाँहो में जाकरा जब वो नहाने के बाद आपने बालों को सूखा रही थी. एक पल के लिए मेनिका को लगा के वो हर रोज़ की तरह मज़ाक में छेद छानी कर रहा था मगर तुरंत बाद मेनिका को झटका लगा; और रणजीत को ज़ोर से धक्का देते हुए बिहेव करने को कहा उसको. मगर रणजीत नहीं माना अओर मेनिका के हाथ पाकर कर उसको आपने बाँहो में ज़ोर से खिंचा जबके मेनिका उसस्के बाँहो से निकालने के लिए स्ट्रगल करने लगी. मगर रणजीत मेनिका के गले और गाल पर आपने जीब फेररने लगा और मेनिका उसस्के बाँहो से निकालने के लिए मचलने लगी. घर में कोई भी नहीं थे उन्न दोनों के इलावा यूयेसेस वक़्त. रणजीत ने आपनी भाभी के चेहरे को एक हाथ में पकड़ा और और किस करने को कह रहा था मेनिका को, पर मेनिका ने आपना मुहन बाँध कर लिया तो रणजीत ने उसस्के होंठों को चुस्सा और कहा;

“ भाभी तुम बहुत ही हॉट हो, मैं तुमको तब से चाहने लगा जिसस दिन तुम पहली बाअर इस घर में आई. भैया तुमको खुश नहीं कर सकता, मुझे सब पाता है, तो मैं वो काम पूरा करूँगा अब, क्यूँ भाभी ठीक रहेगा ना?”

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