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शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 2 )
Date : June 20, 2015, 11:52:49 PM
Languages : Hindi
PageView : 000011778
Categoreies : Hindi Long Sex Stories
शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 2 )

Shaadishudaa Aurat Ki Kahani - Part 2

मेनिका ने कहा;

“मैं पिताजी को सब बताउँगी, जो कुछ तुम ने अभी किया और जो भी तुमने मुझसे कहा” रणजीत ने मेनिका को चोर्रा और जाते हुए मुस्कुरा कर कहा;

“तुम यह नहीं कर सकती और मुझे पता है तुम कुछ भी नहीं बताॉगी अंकल जी को; और मुझे पूरा यकीन है आख़िर में तुम मेरे पास आओगी प्यारी भाभी मेरी और यह मेरा दावा है के तुम खुद सब कुछ बहुत पस्संद करोगी मेरे साथ”

आपने भाभी के साथ वेसा करने के बाद, रणजीत को शाम को आपने अंकल और कविता के घर लौटने के बाद थोड़ा बहुत फिकर होने लगा के कहीं सच में मेनिका कुछ उन्न लोगों को बोल ना दें. सब लाउंज में एकते बैठे थे टीवी देखने के लिए और रणजीत की नज़रें टीवी पर नहीं बलके मेनिका पर त्िीन. मेनिका को पता था, और बाकी लोगों से नज़रें बचाते हुए मेनिका ने इशारे से रणजीत से कहा;

“मैं सब को बता डून के दिन में तुम ने किया किया था आज?”

घबराते हुए रणजीत ने भी इशारों में कहा;

“नहीं तुम वेसा नहीं करोगी!”

पर मेनिका ने धीरे से कहा;

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“कहूँगी!”

तब रणजीत बोला;

“ठीक है बता दो फिर देखना इस परिवार का किया होगा उसस्के बाद!”

और मेनिका ने नॉर्मल आवाज़ में कहा;

“पिता जी आप को पता है आज रणजीत ने किया किया?”

प्रतीक ने नज़रें मेनिका पर करते हुए पूछा;

“काइया किया उसने बहू?”

यह सब सुनकर रणजीत की फटने लगी, गर्मी फील करने लगा वो और मेनिका के तरफ देखते हुए दोनों हाआत को जोध कर इशारे से मेनिका को रुकने के लिए विनती किया. और मेनिका ने शैठानी नज़रों से रणजीत के तरफ देख कर आपने प्रतीक से कहा;

“पियेट जी रणजीत मुझको बहुत छेड़ता रहता है दिन भर एक छोटे बचे की तरह! मुझको तंग कराता रहता है मुझसे लड़ता है! और ख़ाता नहीं है, एक बचे की तरह मुझे उसको आपने हाथ से खिलाना पड़ता है”

यह सुनकर प्रतीक को हँससी आई और वो ज़ोर से हंससा भी, फिर मेनिका को जवाब देते हुए कहा; “बहू वो आखरी है ना, तो लाड़ला है और थोड़ा बिगड़ा हुआ भी. मा का प्यार नहीं मिला उसको शायद इसी लिए तुम्हारे साथ वेसा कराता है. उसकी शरारातों को नज़र अंदाज़ करना बहू. वो बदल जाएगा फिकर नहीं करने का.” और मेनिका यूयेसेस वक़्त रणजीत को देखते हुए चुलबुलाते हुए हँससटी जा रही थी. उसकी यूयेसेस मुस्कुराहट ने खुद उसको धोका दिया, क्यूँ के रणजीत को पता चल गया के अब तो मेनिका कुछ नहीं बोलेगी यूयेसेस बड़े में. खुद से रणजीत बोला; “यह हुई ना बात भाभी आप मुझको धोका नहीं दे सकती, मुझको बचाने के लिए आप ने झूट बोला और बात बना कर बोला, जो कुछ मैं ने तुम्हारे साथ किया वो तो नहीं कहा, मतलब अब भी चान्स है मुझे यॅ!!”

रणजीत को बहुत खुशी हुई के मेनिका ने कुछ नहीं बताया.

दिन गुज़राते गये और जब जब रणजीत घर में मेनिका के साथ अकेले होता तो वो मौके का फएदा ज़रूर उठता था. मेनिका को चूहता था, उसस्के जिस्म के क़िस्सी भी हिस्से पर आपना हाथ फेरर्टा रहता, उसको किस कराता, उसस्के गान्ड पर आपना हाथ फेरर्टा, उसको बाँहो में जकार्ता और बहुत कुछ. मगर मेनिका इस से ज़ियादा उसको कुछ नहीं करने देती थी, हर बार उसस्के चुंगल से निकल जाती थी.

और हर बार मेनिका को चूहने, जकरने और चूमने के बाद रणजीत जाकर मूठ माराता था आपने भाभी को, उसस्के जिस्म को याद करके. उसकी क्लीवेज को सोचता और उसस्के जांघों को और चुहपे हुए उन्न रंगों को जो झपटा झपटी में उसको नज़र आते थे. जेसे के एक बार रणजीत ने मेनिका को धोए हुए भीगे कपड़े को झुक कर निचोर्ता हुआ देख रहा था. यूयेसेस वक़्त मेनिका धुले हुए कपड़े सूखने को डाल रही थी एक धागे पर. रणजीत को मेनिका की मस्त बूब्स नज़र आगाए. उसकी जवान कुँवारी चुचियाँ बस जान लेवा थे. रणजीत को उससी वक़्त उन्न चुचियों को हाथ से मस्सलने का मॅन कर रहा था, उन्न को मुहन में लेकर चुस्सने को बड़ा मॅन कर रहा था…. बलके यूयेसेस वक़्त रणजीत ने खुलकर मेनिका से कह दिया था के वो उसकी जिस्म से कितना आकर्षित होता है उसको कितना उतेज़ीना होता है उसकी जिस्म देख कर…. रणजीत ने मेनिका को यूयेसेस वक़्त जाकरा था, चुम्मा था, और बहुत झपटा झपटी के बाद रणजीत ने आपने मुँह को चुचियों के उपरी हिस्से पर लेगया था, जीब थोड़ा सा फेररा था मगर मेनिका ने ज़ियादा नहीं अगुए बढ़ने दिया और वहाँ से भाग गयी थी.

दिन वेसे गुज़र रह थे. लग भाग हर रोज़ एसे ही गुज़राते थे. मेनिका और रणजीत दिन में घर पर अकेले रहते थे अक्सर. प्रतीक और कविता खेत जाते थे. और एसे ही 5 महीने बीट गये.

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और एक रात की बात यह हुई. रणजीत को ज़ोर से पेशाब लगी और मुठने के लिए वो बीच रात में उठा टाय्लेट जाने के लिए. उसका का कमरा बाएँ तरफ था, कविता का कमरा दाएँ तरफ और प्रतीक का कर्मा कविता के कमरे के पीछे था. एक कॉरिडर दोनों भाइयों के कमरे को सेपरेट कराता था. वो कॉरिडर एक तरफ किचन में जाता था और दूसरे तरफ से लाउंज में. तो टाय्लेट जाने के लिए उसको कॉरिडर से होकर तब किचन से गुज़र कर बाहर जाना पड़ता था. हाँ टाय्लेट बाहर था. और रणजीत को इन्न सब जगाव से गुज़र कर बाहर टाय्लेट को जाना था मगर कविता के कमरे के पास से भी गुज़रना होता था उसको.

तो रणजीत किचन का दरवाज़ा खोलने ही वाला था के उसको आपने अंकल के रूम से आवाज़ें सुनाई दिए. वो मुस्कुराया यह कहकर, ‘पापा भी ना नींध में बातें कर रहा है हहहे’… मगर फिर कुछ एसी आवाज़ें आई जेसे क़िस्सी की सिसकारी… और फुसफुसाहट करते हुए जेसे बातें सुनाई दिए उसको. रणजीत आपने अंकल के दरवाज़े से कान लगाया तो मेनिका की आवाज़ सुनाई दिए उसको….. मेनिका कह रही थी, “मुझे अब जाना चाहिए अंकल जी!” रणजीत को झटका लगा और सोचने लगा के इतने रात गये मेनिका किया कर रही है अंकल जी के कमरे में? और रणजीत ने सोचा हो सकता है पिताजी की तबीयत खराब हुई होगी तो मेनिका पानी वाघहैरा देने के लिए गयी होगी…. या फिर पयर दबाने के लिए गयी होगी शायद…. फिर भी रणजीत को बहुत हेरानी हुई और अजीब लगा. तो उसने चुप कर मेनिका को कमरे से निकलते हुए देखना चाहा. तो रणजीत रेफ्रिजरेटर के पीछे चुप गया क्यूँ के सब लाइट्स तो ऑफ थी यूयेसेस वक़्त और कोई उसको देख नहीं पाता. मगर वौसस जगह से आपने अंकल के कमरे से क़िस्सी को भी निकलते या अंदर जाते देख सकता था.

और जब दरवाज़ा खुला कमरे का तो रणजीत ने देखा के पहले उसका अंकल बाहर आया. कॉरिडर में दोनों तरफ देखा और फिर मेनिका से कहा; “निकल सकती हो कोई नहीं है” और मेनिका बाहर निकली. रणजीत को बहुत बड़ा झटका लगा यह देख कर के मेनिका एक बहुत पतली से नाइटी पहनी हुई थी जिसस पर पतली पतली स्ट्रॅप्स थे, उसकी चुचियाँ नज़र आ रहे थे और उसने ब्रा नहीं पहनी हुई थी…. बाल खुले हुए थे, क़यामत लग रही थी वो यूयेसेस वक़्त….. कमर लचकते हुए चल कर आपने कमरे तक गयी और मूधकर आपने प्रतीक को एक बहुत सेक्सी मुस्कुरात से देखा, और कहा, “ओक अब आप आराम से सो जाइए अंकल जी.”

रणजीत एक तो बिलकूल शॉक्ड था मगर उसका लंड जमके खाड़ा हो गया था मेनिका को यूयेसेस रूप में देख कर. रणजीत ने खुद से कहा; “ओह माई गोद, अंकल जी उसको चोद रहा है?!! और मैं इतने दिनों से झहहाक मार रहा हूँ?! नहीं नहीं नहीं एसा नहीं हो सकता!! एसा हो ही नहीं सकता…. मेरे दिमाघ में गंदे ख़यालात इस लिए आ रहे हेँ क्यूंके मैं मेनिका को यूयेसेस नज़र से देखता हूँ…. कोई और बात हुई होगी मेरे ख़यालात गंदे हेँ, मैं गंदा हूँ!!!”

टाय्लेट से रणजीत वापस आपने कमरे में जाकर सोच में प़ड़ जाता है. उसकी नींध बिलकूल उध गयी. वो सोचने लगा खुद से बातें करते हुए; “अगर अंकल जी और भाभी की अफेर चल रही है तो कब से? केसे शुरू हुआ होगा? किया पिताजी ने भी मेनिका को वेसे ही आप्रोच किया होगा जेसे मैं कराता रहता हूँ? किया मेनिका ने शुरू में इनकार किया फिर आक्सेप्ट कर लिया? किया मेनिका अंकल जी के कमरे में सेक्स के लिए गयी थी? या मैं वेसा सोच रहा था क्यूंके मैं खुद वेसा हूँ? मगर वो नाइटी में क्यूँ थी? भाभी ने ब्रा क्यूँ नहीं पहनी थी? क्यूँ इतनी सेक्सी स्ट्रॅप्स वाले नाइटी में थी जब उसको पता था अंकल जी के कमरे में जाना है? नाइटी छोटी थी जो उसस्के जांघों तक रीच होती थी और उसकी गडराए खूबसूरात जांघें सॉफ नज़र आते थे यूयेसेस नाइटी में और वो अंकल जी के पास गयी थी यूयेसेस रूप में??!!” रणजीत बहुत बेचैन था और सूबह तक सोचता रहा इस बड़े में. बिलकूल एँखहें नहीं बंद किया उसने और आपने भाभी को आपने अंकल के साथ सोचते हुए उसने दो बार मूठ मारा.

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हर सूबह को उसस्के बड़ा भाई और अंकल बहुत सवेरे, 6 बजे के करीब घर से निकल जाते हेँ खेत के लिए. यूयेसेस समाए रणजीत हर रोज़ सोया रहता है और करीब 10 बाजे सोकर उठता है क्यूँ के वो बेकार था और घर पर ही रहता था. उसने आपने अंकल की 4जे4 स्टार्ट होते हुए सुना तो उसको पता चल गया के वह लोग खेत के लिए निकल रहे हेँ.

गन्ने के खेत जो कोई 10/12 बीघा के थे, वहाँ बहुत सारे लोग उन्न के लिए काम करते हेँ. रणजीत का अंकल मालिक था उन्न सारे ज़मीनों के तो सब लोग उन्न के लिए काम करते थे और वो कविता के साथ सब दिन भर चेक करते थे, सभी लोगों को, ज़मीन के इस कोने से यूयेसेस कोने तक कंट्रोल करते थे. कभी खुद हाथ बताते भी थे काम में. आपने हॅंडिकॅप के बावजूद कविता एक किसान का काम बाखूबी कराता था और असिस्टेंट बॉस का भी. बाकी के किसान उसको छोटे मलिक बुलाते थे और बहुत चाहते थे उससे. इस लिए के कविता को काम अच्छी तरह से पता था तो उसस्के अंकल उसको क़िस्सी फील्ड में अकेले चोर्र देता था और वो क़िस्सी दूसरे फील्ड में चला जाता था मॉनिटर करने. और कभी कभी मेनिका उन्न लोगों के लिए खाना लाती थी खेत में मगर हामेशा नहीं. अक्सर वह लोग खाना डिब्बे में लेकर जाते थे घर से. और एकात बार जब मेनिका खेत गयी तो उसको सभी खेतों को दिखाया गया सब समझाया गया के केसे काम होते हेँ वाघहैरा. प्रतीक गया था मेनिका को 4जे4 में घर से खेत में लाने के लिए क्यूंके मेनिका खेत देखना चाहती थी, तो पहला दिन एसा हुआ के प्रतीक ने कहा;

“तो ठीक है अगर तुम खेत घूमना चाहती हो तो आज हम खाना नहीं लेजाते हेँ. तुम गरमा गरम पक्का के तय्यार रहना मैं तुमको लेने ओँगा 11 बजे तब खाना लेकर चॅलेंज और कविता को तू खिला देना खेत में ही और मैं भी वहीं बैठ के खलूँगा खेत में खाने का मज़ा कुछ और ही है खुली हवा में पयर के नीचे बैठ कर……”

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