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शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 3 )
Date : June 20, 2015, 11:53:16 PM
Languages : Hindi
PageView : 000011927
Categoreies : Hindi Long Sex Stories
शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 3 )

Shaadishudaa Aurat Ki Kahani - Part 3

तो यूयेसेस दिन के बाद जब जब मेनिका का मॅन खेत जाने का होता तो उन्न दिनों को बाप बेटा खाना लेकर नहीं जाते थे 11 बजे प्रतीक लेने आता था मेनिका को तब खाना लेकर वापस खेत जाते थे. अब काई बार एसा हुआ के जिसस जिसस दिन को मेनिका को प्रतीक खेत लेगया उन्न दिनों रणजीत घर पर नहीं होते थे. उसको उसस्के अंकल जी पेस्टिसाइड खरीदने के लिए शहेर भेज दिया कराता था. तो रणजीत को पता भी नहीं चला था के मेनिका खेत गयी हुई थी क़िस्सी दिन.

अब इस दिन को जब रणजीत के अंकल और कविता खेत चले गये तो रणजीत को बहुत जल्दी थी मेनिका से कल रात वाले बात के बड़े में पूछने के लिए. जल्दी से रणजीत उठकर गया मेनिका को ढूँडने तो पाया के वो उन्न लोगों को वेव कर रही थी. रणजीत फ्रेश होने गया और उसको उतना सवेरे जागे हुए देख कर उसस्के भाभी ने टोका;

“अरे वा! आज सूरज कहीं पासचिं से तो नहीं उठा? तुम इतने सवेरे केसे उठ गये आज?” बिना कोई जवाब दिए रणजीत आपने कमरे में चला गया, कपड़े बदले, छाए पीने को आया. और छाए पीते वक़्त उसकी नज़रें मेनिका को उपर से नीचे घुर्रे जा रहे थे और मेनिका को पता था. तो मेनिका बोली;

“तुम मुझको एसा घूर्रणा बंद करो वरना एक लाफा मारूँगी हाँ!”

रणजीत बोला: “सच में भाभी? मुझको मरोगी? उसस्के बाद अफ़सोस नहीं होगा आप को?”

मेनिका: “नहीं एक बुरे लड़के को मारने से मुझको कोई अफ़सोस नहीं होगा!”

रणजीत: “और आप भाभी, आप अच्छी लड़की हो?”

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मेनिका: “हाँ बिलकूल अच्छी हूँ कोई शक़ुए है तुम्हें?”

यह सुनने के बाद रणजीत को कल रात वाले वाकीया को लेकर, आपने सोच पर और भी डाउट्स हुआ…. मेनिका तो बहुत भोली दिख रही थी और बिलकूल नहीं लग रहा था के उसने कुछ बुरा किया हो…. उसने सोचा के मेनिका की कोई मतलब नहीं थी उसस्के अंकल के साथ यह उसस्के दिमाघ का वहेँ था, गंदे सोच थे उसस्के. रणजीत ने सोचा के अगर उसने सवाल किया और जवाब नहीं हुआ तो वो शरम में पर जाएगा और मुहन दिखाने लायक नहीं रहेगा. तो रणजीत ने डिसाइड किया के कुछ नहीं पूछेगा आपनी भाभी से बलके कुछ और प्लान करने लगा रणजीत. उसने सोचा के कुछ रातों को वो नहीं सोएगा और उन्न दोनों पर नज़र रखेगा और अगर दोनों के बीच कुछ होगा तो उसको पता चल जाएगा.

रणजीत चल कर मेनिका के करीब गाया और आपने हाथ को उसकी गान्ड पर फेररा. मेनिका ने उसको मारना चाहा मगर रणजीत भाग निकला वहाँ से. मेनिका यूयेसेस वक़्त एक टू पीस में थी और सींक के पास खड़ी बरटान मांझ रही थी. तो नाल से पानी फेंका मेनिका ने रणजीत पर जब वो भाग रहा था तो. और रणजीत के लिए एकहनेल बन गया, वो वापस धीरे से आता और उसको चूहता, फिर वो यूयेसेस पर पानी फेंकती… काई बार रणजीत ने एसा किया. और जब मेनिका बर्तनों को सूखे कपड़े से सूखा रही थी तो रणजीत ने आकर उसको आपने बाँहो में जाकरा प्यार से और किस किया उसस्के गालों पर, उसका तन्ना हुआ लंड मेनिका के जांघों पर डब्बे हुए थे और उसस्के होंठ मेनिका के गले पर फेरर रहे थे यूयेसेस दौरान. मेनिका उसको पुश करने लगी, मगर रणजीत ज़ियादा ताक़तवर था तो मेनिका को ज़ोर से दबाया दीवार पर. मेनिका ने जब उसस्के लंड को आपने जिस्म पर रगढ़ता हुआ फील किया तो मेनिका ने पोज़िशन बदलने की कोशिश किए तब उसका लंड उसकी दूसरे जाँघ पर रगढ़ने लगा, और एक हाथ से रणजीत आपनी भाभी की स्कर्ट उठाकर उसकी जाँघ को महसूस करने लगा हथेली से तो मेनिका जल्दी से नीचे बैठ गयी उसको रोकने के लिए. आपने जीब से रणजीत ने मेनिका के पूरे चेहरे को छाता और फिर किस करने की कोशिश किया मेनिका को मगर मेनिका ने मुहन बंद रखा और बिलकूल रेस्पॉंड नहीं किया, तो रणजीत तंग आगेया तो वहाँ से चला गया थोड़ा घुस्सा करते हुए. मगर जाते जाते यह कह गया आपनी भाभी को;

“भाबी मैं तुमको बहुत प्यार कराता हूँ, और यह तुमको पता है. मैं बार बाअर इस बात को नहीं दोहरौंगा. मेनिका ने उसस्के इस बात पर सिर्फ़ एक छोटी सी मुस्कान के साथ सर को झुका ली.
जब मेनिका आपने बाकी घर के काम काज में बिज़ी थी तो रणजीत आपने अंकल के कमरे में गया यह देखने के उसको कोई एसी जगह दिखे जहाँ से वो बाहर से अंदर देख सके रात को. यूयेसेस कमरे में खीरकी के इलावा सिर्फ़ एक बहुत ही छोटा सा स्पेस था जहाँ एसी इनस्टॉल किया गया था. वो बाहर जाकर देखा तो उसकी ऊचाई वहाँ तक नहीं रीच होता था बाहर से. तो एक कुर्सी लिया अंदर से और बाहर एसी के नीचे रखा फिर चेर पर चाहद कर आपने अंकल के कमरे में देखा, तो बेहद खुश हुआ के उसस्के अंकल का पूरा कमरा नज़र अरहा था यूयेसेस जगह से….

तो दोस्तो, जब रणजीत को यकीन हो गया के अब वो रात को आपने अंकल के कमरे के अंदर देख सकेगा तो उसको आराम मिला और वो हश हुआ और बेसब्री से इंतेज़ार किया के रात यूयेसेस के घर को विज़िट करें.

पाठकोन को समझने के लिए के एक दूसरे के कमरे कहाँ कहाँ थे और किधर से रणजीत कमरे के अंदर झाँकेगा, मैं ने एक स्केच बनाया है जिसस से आप सब को अच्छी तरह से समझ में आए. यह रहा स्केच:

रात हुई और सब टीवी देखने के बाद आपने आपने कमरे में चले गये. कविता (मेनिका का पाती) टीवी बहुत कूम देखता था. वो हर रात को ठीक 9 बजे सोने चला जाता था, एक तो खेत के काम का थकान और उसकी आदत थी जल्दी सोने की बचपन से ही.

रणजीत आपने कमरे में गया और इंतेज़ार कराता रहा रात को और गहरी होने की. आपने कमरे के अंदर से ही वो सुनने की कोशिश कराता रहा के उसको क़िस्सी दरवाज़े की खुलने या बाँध होने की आवाज़ आए उसको. वो प्राय कराता रहा के उसको कुछ दिख जाए इस रात को. पर उसको अभी तक यकीन ही नहीं था के यह सब उसका वहेँ था या सच में उसस्के अंकल और मेनिका के बीच कुछ था भी के नहीं.

एक घंटे के बाद वो 2 बार बाहर गया देखने के लिए मगर कुछ नहीं दिखा उससे. निराश वापस आया आपने कमरे में. “काइया वह दोनों नहीं मिलेंगुए आज रात को….. कुछ नहीं होने वाला काइया??” एसा खुद से पूछा रणजीत ने, और यह ख़यालात उसको बहुत परेशान कर रहे थे……. पाठकोन को दिखेगा स्केच में मैं ने एक रीड (लाल) स्पॉट बनाया है जो घर के बाहर है. रणजीत उससी जगह से एक कुर्सी पर चढ़ कर आपने अंकल के रूम में देखता है. बाकी घर के अंदर क़िस्सका कमरा किधर है सब सॉफ बनाया है मैं ने इस से आप साभों के समझ में अज़ाएगा के कौन किधर सोता है रात को वाघहैरा. घर का नक्शा बिलकूल वेसा ही है जो मैं ने बनाया है.

सूबह 1 बजे तक 4 बार रणजीत बाहर जाकर कमरे के अंदर झाँक आया मगर कुछ नहीं दिखा उससे. बहुत ही बेचैन था वो और सो नहीं पा रहा था. करवटें बदलता गया आपने बिस्तर पर उससी बेचैनी में के उसको 2.30 बजे कॉरिडर में एक दरवाज़े का बंद होना सुनाई दिया. (नक्शे में देखिएगा आप लोग) … कविता का कर्मा ठीक उसस्के कमरे के यूयेसेस तरफ है और दरवाज़ा भी दूर नहीं है रणजीत के दरवाज़े से…. (नक्शे में मैं ने दरवाज़े को एक छोटा सा ओपन स्पेस चोर्रा है)….. तो आवाज़ सुनकर झप्पत्ते हुए वो कमरे से निकला. आपने रूम के दरवाज़े को बहुत ही धीरे से खोला बिना कोई शोर किए हुए, और बिना क़िस्सी लाइट को स्विच किए हुए वो किचन के दरवाज़े से बाहर निकला और कुर्सी जिससे उसने पहले से वहीं रखा हुआ था यूयेसेस पर चढ़ कर एसी के पास देखने गया आपने अंकल के कमरे में.

उसस्के एँखहें खुले के खुले रह गये जो नज़ारा उसस्के एँखहू ने देखा अंदर!! मेनिका, उसकी भाभी बिलकूल नंगी थी उसस्के अंकल के पास उसस्के बिस्तर पर. उसकी नाइटी अलमारी पर लटकी हुई थी और मेनिका आपने प्रतीक का लंड चुस्स रही थी जबके प्रतीक पीठ पर लेटा हुआ था, और वो भी नंगा था. मेनिका आपने हाथ में प्रतीक के मोटे लंड को थामे जमके चुस्स रही थी और एकात बार आपने जीब से चाट रही थी फिर्र चुस्सती जा रही थी…. बूढ़ा आपने कमर को उपर नीचे करते हुए हौले हौले जेसे पुश इन और आउट कर रहा था मेनिका के मुँह में….

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रणजीत को गरम और ठंड दोनों लगा एक साथ वो दृष्ट देख कर. वो सोचने लगा के इतने दिनों से वो मेनिका को पाने की कोशिश कर रहा है और मेनिका सती सविर्ट्री बन रही थी और यहाँ आपने प्रतीक के साथ यह सब कर रही है!! ‘यह सब कब से चल रहा है’ रणजीत ने सोचा. पहली बार कब हुआ था? उसस्के अंकल को केसे मेनिका मिल गयी? और कविता? किया उसको पता भी है? अगर वो अचानक उठ गया तो किया होगा? भाभी ने केसे इतना बड़ा रिस्क ले लिया? इतनी हिमत केसे हुई उसे? यह सब सोचते हुए रणजीत का सर चकराने लगा.

फिर अंदर देखा तो मेनिका आपनी पीठ पर लेटी हुई थी और उसस्के अंकल मेनिका की चुत को चुस्स रहा था…. मेनिका आपने प्रतीक के सर को हाथों में दबाए हुए बिस्तर पर आपने जिस्म को रवणद रही थी….. उसकी खूबसूरात जवान नंगी जिस्म यूयेसेस वक़्त प्रतीक के क़ब्ज़े में था…. और जल्द ही प्रतीक उपर गया और आपने मज़बूत हाथों में मेनिका के जवान चुचियों को मस्सलते हुए उसस्के एरेक्ट निपल्स पर आपना जीब फेररने लगा…. 18 साल की जवान बहू के निपल्स!!!

रणजीत को बहुत बहुत घुस्सा आया, उसको मॅन किया के तुरंत जाकर आपने अंकल के कमरे के दरवाज़े पर ज़ोर से लात मारके अंदर घुस्से और तमाशा खड़ा करें….. यूयेसेस वक़्त उसका दिमाघ ने काम करना बंद कर दिया, सोच रहा था के वो वोही करे जो सोच रहा है या वेसा करना घालत होगा…. उसका दिमाघ जेसे ब्लॅंक हो गया कुछ देर के लिए….. रणजीत ने अचानक आपने जिस्म में ठंड और एक कंपन महसूस किया, उसका गला सूख गया थूक भी नहीं निगल पा रहा था, और फिर्र उसको गर्मी महसूस हुई जेसे के उसको बुखार हुआ हो…..

जब फिर से अंदर देखा तो उसस्के अंकल मेनिका को चोदने लगा था. मेनिका के दोनों पयर फेयलिए हुए थे और आपने प्रतीक के लंड को बड़ी मज़े से आपने अंदर ले रही थी मेनिका, और साथ साथ प्रतीक के गले पर दाँत काट रही थी और चाट रही थी, उसस्के बाहें प्रतीक के जिस्म को लपेटे हुए थे उसस्के बाँहो के नीचे से और मेनिका के हथेली प्रतीक के कांधों पर थे उसको थामे हुए, जकरे हुए…. प्रतीक के कमर ज़ोरों से हिल रहे थे और उसस्के मूव्मेंट्स ने और ज़ोर पाकरे और वो आपने लंड को मेनिका की जवान चुत के अंदर अंदर बाहर कराता गया एक के बाद एक ज़बरदस्त धक्का देते हुए और उसस्के सिसकारियाँ छूटने लगे साथ में मेनिका भी तारपने लगी धीमी धीमी आवाज़ में….. प्रतीक हंफफने लगा और ट्रापते आवाज़ में घुर्राटे हुए “आागघ्गघघघ्गग्घह “ की आवाज़ किए उसने…. और बहुत जल्द मेनिका आपनी आवाज़ को संभालते हुए धीरे से चिलाआए “आआआअहह इसस्स्स्स्स्स्स्शह उफफफफफफफफ्फ़…..आआआआहह” फिर झट से प्रतीक ने आपने लंड को चुत के बाहर निकाला और आपने वीरया को मेनिका के पेत के उपर चोर्रा…. उसस्के बूब्स तक प्रतीक का वीरया गया और कुछ कतरे मेनिका के गले पर भी पड़े… मेनिका ने आपने हातेली से वीरया को आपने जिस्म पर मास्सला प्रतीक के चेहरे में मुस्कुराते हुए देख कर…. फिर उठ कर मेनिका ने प्रतीक के लंड को आपने मुहन में ले लिया….. फिर दोनों एक दूसरे को बाँहो में लेकर किस किए और दोनों आराम से लेट गये बिस्तर पर हनफ़फ्टे हुए….

वो सब देख कर रणजीत का दिल टूट गया क्यूंके वो मेनिका से प्यार करने लगा था. अंदर वापस गया वो और रएफएगेरटोर के पीछे चुप गया यूयेसेस रात की तरह मेनिका को आपने टा के कमरे से बाहर निकलते हुए देलहने के लिए. और वो निकली यूयेसेस रात की तरह. और इस बार मेनिका ने आपने प्रतीक को हग किया आपने कमरे में वापस जाने से पहले. (नक्शे में आप लोग देख सकते हेँ के रेफ़्रेगिरटोर किधर है और रणजीत के अंकल की रूम का दरवाज़ा कहा है और किधर से रणजीत देख रहा था और कहाँ से कहाँ तक चल कर मेनिका वापस आपने कमरे में गयी.) तो वो सब रणजीत ने देखा.

जब मेनिका ने आपने रूम का दरवाज़ा बाँध कर लिया, तो आहिस्ते से रणजीत वापस आपने कमरे में गया और घुस्से से लाल था वो. उसका मॅन किया उससी वक़्त मेनिका के कमरे में जाकर उसको लातों लात मारने को. “रंडी है साली” रणजीत ने कहा. “खुद को बड़ी सॉफ सूत्री दिखती है” और रणजीत सोचने लगा के इतने दिनों से वो उसको बाँहो में जाकर रहा है आपने लंड को उसस्के जिस्म पर रगढ़ रहा है, केसे उसको किस भी कराता है मगर मेनिका हमेशा उसको धक्का देकर चली जाती है कभी भी रेस्पॉंड नहीं कराती….. यह सब सोचते हुए उसको यकीन नहीं हो रहा के वो एसा कर सकती है जो कुछ अभी उसस्के एँखहू ने देखा!!

अब रणजीत सोचने लगा के जिसस दिन मेनिका ने कहा था के उसस्के अंकल जी को सब कुछ बता देगी तो किया तबसे उन्न दोनों के बीच यह सब चल रहा है? तभी उसने आपने प्रतीक के साथ सब शुरू कर दिया था काइया? आख़िर कब से आपने प्रतीक से चुदया रही है वो यह सोच सोच कर रणजीत पागल हो रहा था. उसको रात भर फिर से नींध नहीं आई और कुछ ही देर में सूबह हो गयी. और जब सूरज के किरणें उसस्के कमरे में आने लगे तब उसको नींद आई.

मेनिका काई बार उसको जगाने के लिए गयी मगर वो नहीं उठा गहरी नींध में सोता रहा. आखरी बार दिन के 1 बजे मेनिका उसको चौथी बार जगाने गयी तब वो उठा. उसका सर दर्द कर रहा था और नहीं उतना चाहता था तब भी…. केसे भी करके वो उठा और नहाने के बाद उसने मेनिका को लाउंज में बुलाया यह कहकर के उसको उसस्स से ज़रूरी बातें करनी है.

मेनिका गयी और रणजीत ने शुरू किया;

“तो मुझको आपने साथ सोने के लिए एक मौका नहीं दोगी भाभी?”

मेनिका: “नहीं, कभी नहीं”
रणजीत: “मगर क्यूँ भाभी? हम बड़ी आराम से एक रिश्ता बना सकते हेँ क़िस्सी को भी पता तक नहीं चलेगा. मैं तुम्हें कितना चाहता हूँ… मैं 18 का हूँ और तुम भी, हम एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझ सकते हेँ, है ना भाभी?”

मेनिका: “नहीं यह ठीक नहीं होगा रणजीत, तुम मेरे भाई की तरह हो, यह बहुत गंदी बात होगी ची!!”

रणजीत: “अच्छा? गंदी कह रही हो? और तुम भाभी सॉफ और पावितार हो? मैं ज़ियादा जवान हूँ और तुमको आधेर और एक्सपीरियेन्स्ड मर्द पस्संद है?”

मेनिका: “काइया बकवास कर रहे हो? दिमाघ ठिकाने है तुम्हारा?” मेनिका ने घुस्सा दिखाया और उसका चेहरा लाल हो गया.

रणजीत मेनिका के करीब गाया और एक ज़ोर का तप़ड़ मारा उसको. मेनिका को शॉक लगा और रणजीत को हेरानी से देखा तो उसने एक और ज़ोर का तमाचा मारा मेनिका को. वो बैठ कर रोने लगी और रणजीत ने उसको उठाया और एक तीसरा तमाचा ज़ोर से मारा उसस्के गाल पर जो बिलकूल लाल हो गये थे. और ज़ोर से रणजीत ने कहा;

“सती सावित्री बनने का नाटक बाँध करो भाभी!! मैं ने दो रातों को लगातार तुम को मेरे अंकल से चुद़वाते हुए देखा!! रंडी साली!! तुम तो पक्का रंडी निकली!! आपने प्रतीक से चुद़वति हो?! साली कुट्टी कामिनी! और मुझसे सॉफ सूत्री वाली बात करने चली कुट्टी कहीं की! मैं ने तुमसे प्यार किया था साली समझी तू? ई लव्ड यू डॅम इट!! ई रियली लव्ड यू! अगर मेरा भाई तुमको खुश नहीं कर सकता तो मैं ने सोचा था के, मैं तुमसे शादी करूँगा!! मैं तुम्हारे साथ जीने का सोच रहा था. मगर तुम तो साली रंडी निकली!! मैं बच गया रे! बच गया मैं तो! तो बता अब किया कहना है तुम्हें? है कुछ कहने को बाकी? अब किया बहाना बनाएगी तू? बोल??!!!”

मेनिका नीचे फर्श पर बैठी एक बची की तरह रो रही थी. उसस्के समझ में नहीं अराही थी के किया कहें बस रोटी जा रही थी.

घुस्से से चिल्लाते हुए रणजीत ने कहा;

“नहीं बोलॉगी? कुछ कहना है भी के नहीं? चुप रहना है? ओके ठीक है मैं अभी इसी वक़्त इस घर को चोर्र के जा रहा हूँ. कभी इस घर में वापस नहीं ओँगा, अगर मेरे दाद ने पूछा के मैं कहाँ हूँ तो बता देना के मुझको तुम दोनों के बड़े में सब पता चल गया. मुझे कविता भाई के लिए बहुत अफ़सोस हो रहा है मगर मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकता इस घर में अब!”

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