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शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 4 )
Date : June 20, 2015, 11:53:45 PM
Languages : Hindi
PageView : 000011184
Categoreies : Hindi Long Sex Stories
शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 4 )

Shaadishudaa Aurat Ki Kahani - Part 4

कविता के कदम घर के बाहर के अवर् बढ़ ही रहे थे के मेनिका जल्दी से उसको पीछे से थामा और रोते हुए कहा;

“रुक जाओ, रुक जाओ प्लीज़, भगवान के लिए मत जाओ, कहीं मत जाओ, अब मुझे जो कहना है वो सुनलो तब डिसाइड करना किया करना है तुम्हें…. मैं तुमको समझती हूँ के क्यूँ और केसे यह सब हुआ. इन्न सब के पीछे एक लंबी दास्ठान है जिस्सको सुनकर तुम खुद दंग रह जाओगे. सब जानने के बाद बठाना के मेरा सपोर्ट करोगे या चोर्र कर चले जाओगे!… और किया कहा तुमने मुझसे प्यार करते हो? वा? केसा प्यार है के चोर्र कर जा रहे जब मैं मजधार में हूँ तो थे हा? अब सुनलो के मैं भी तुमको चाहती हूँ, शुरू से ही मगर आपने आप पर कितना काबू रखती हूँ यह मैं ही जानती हूँ…. प्यार कराती हूँ सच में तुमसे मगर हालात कुछ एसे हो गये के मुझको तुमसे नफ़रात करवानी पड़ी मुझे….कुछ एसे हालात पैदा हुए के मेरे कंट्रोल से सब बाहर होता गया, मैं संभाल नहीं पाई…. सब बेकाबू होता गया…..

रणजीत पिघलने लगा और नीचे से मेनिका को बाँहो में भरके सोफे तक लेजाजर बैठाया और कहा;

“बताओ भाभी , बोलो एसी किया बाअट हुई, बताओ मुझे मैं बहुत बेचैन हूँ सब जानने के लिए. मुझे यकीन था के कुछ ना कुछ ज़रूर हुआ होगा, शुरू से बताओ मुझे यह सब कब से शुरू हुआ भाभी? मेरा मतलब है तुम्हारे इस घर में आने के कितने दिनों बाद सब शुरू हुआ अंकल जी के साथ? शुरू से बताओ मुझे और मेरा वादा है के अगर मुझसे इस में तुम निर्दोष लगे तो तुमको कभी नहीं चोर्र के ज़ाऊगा.

तो मेनिका ने आपने एनसू पोंछे और रणजीत को आपने पास बैठने को कहा और उसने बोलना शुरू किया;

“मैं बहुत बेचैन रहती थी के तेरा भाई मुझसे संभोग नहीं कर रहा था. अंकल जी ने काई बार मुझसे पूछा के हम ने सेक्षुयल इंटरकोर्स किए या नहीं…..”

तो मेनिका ने रणजीत को बठाना शुरू किया के केसे और कब से सब शुरू हुआ. उसने बताया के एक दिन वो 4जे4 में खेत गयी थी प्रतीक के साथ. मेनिका उन्न दोनों के लिए खाना बना के इंतेज़ार कर रही थी और 11 बजे वो मेनिका को लेने आया. यूयेसेस दिन रणजीत घर पर नहीं था. वो शादी के 3 महीने बाद की बात थी. प्रतीक ने यूयेसेस से पहले 3 या 4 बार कविता और मेनिका के रिलेशन्षिप के बड़े में मेनिका से बात कर चक्का था. तो यूयेसेस दिन गाड़ी में जाते वक़्त भी प्रतीक ने फिर से बात छेड़ी थी. और कुछ दूर जा कर गाड़ी को एक सुनसान जगह पर खेतों के बीच रोक दिया और बातें करने के लिए. प्रतीक ने पूछा;

“बहू आख़िर कब तक एसा चलेगा तुम्हारे और कविता के बीच? तुम ने अभी तक उसस्के साथ सेक्स नहीं किया तो एसा केसे चलेगा बहू? हमें आपना फॅमिली बढ़ाना है बहू और मुझे आपने पोटा पोतियों को देखना है, वंश को आगुए बढ़ाना है!! देखो कितने खेत हेँ, कितने ज़मीन जैइयदात है इन्न सब के लिए वंश चाहिए मुझे!!”

मेनिका ने प्रतीक को जवाब दिया;

“मैं किया कर सकती हूँ अंकल जी? कविता इतना शर्मिला है के मुझको हाथ भी नहीं लगाता बिलकूल. वो मुझसे पीठ घुमा के सोता है और बिलकूल हिमत नहीं कराता मेरे तरफ मूढ़ने की. कहता है मेरा इज़त कराता है और मुझको नुकसान नहीं पहुँचा सकता… मैं यूयेसेस के करीब जाअनए की बहुत कोशिश किए जेसे आप ने बताया था मगर कोई फएदा नहीं हुआ अंकल जी!”

और प्रतीक जी को एक आइडिया आया, तो यूयेसेस ने कहा; “ सूणों तो फिर मुझे लगता है मुझको खुद रात को तुम्हारे कमरे में आना होगा और कविता से बात करना होगा के क्यूँ वो आपने सुहाग रात को अंजाम नहीं दे रहा! किया ख़याल है बहू?”
मेनिका ने जवाब दिया, “जेसा आप ठीक समझे अंकल जी.”
और प्रतीक ने और कहा; “मेरे ख़याल से कविता को थोड़ा सा हौसले की ज़रूरात है जो मैं दे सकता हूँ शायद, मगर तुम्हारा साथ भी चाहिएगा मुझे उसस्के लिए बहू… किया तुमको एतराज़ होगी अगर मुझे तुमको चूहना पड़े कविता को हिमत दिलाने के लिए तो? वो बहुत ज़रूरी होगी बहू समझने की कोशिश करो!”

मेनिका ने जवाब दिया; “मैं आपनी सुहाग रात को कामयाब करने लिए कुछ भी करने को तयार हूँ अंकल जी, जो भी आप कहोगे मैं करूँगी, क्यूंके मुझे भी लगता है उसस्स्कॉ हिमत और हौसले की ज़रूरात है जो मैं नहीं दे पाती हूँ, मेरे ख़याल से आप उसस्के मदद ज़रूर कर पाओगे, क्यूंके जो भी आप उससे कहते हो वो हमेशा कराता है.”

तो यूयेसेस रात को जब मेनिका आपने कमरे में जा रही थी तो प्रतीक ने उसको बुलाया. यूयेसेस वक़्त रणजीत टीवी देख रहा था; यूयेसेस वक़्त उसको कुछ पता नहीं चला था. और कविता सो चक्का था तब तक. प्रतीक और बहू दोनों ने किचन में धीरे धीरे बात किए. प्रतीक ने कहा; “तुम आपनी सबसे सेक्सी नाइटी पहेलो उसको रिझाने के लिए बहू, मैं अंदर आता हूँ यूयेसेस से बात करने के लिए, तुम उसको जगाओ तब तक मैं अभी आया.”

मेनिका ने प्रतीक को जवाब दिया;

“ठीक है अंकल जी मगर एक बात है, किया रणजीत को सुनाई नहीं देगा अगर वो कॉरिडर से गुज़रा तो? वो अभी तक टीवी देख रहा है और हमारे कमरे के पास से गुज़रेगा आपने कमरे में जाने के लिए!”

तो प्रतीक ने कहा;[/फ़ॉन्ट]

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“तो फिर ठीक है मैं रणजीत को आपने कमरे में जाने का इंतेज़ार कराता हूँ, जब वो सोने चला जाएगा तब ओँगा तेरे पास ओके?”

मेनिका मन गयी और आपने कमरे में चली गयी कपड़े बदलने. मेनिका ने आपने कपड़े उतारे जो पहनी हुई थी और नाइटी पहें लिया. वेसे तो हर रात को बिना ब्रा के नाइटी पहेनटी थी मगर इस रात को, क्यूँ के उसस्के प्रतीक आने वाला था तो मेनिका ने ब्रा नहीं उतरा, ब्रा के उपर ही नाइटी पहें लिया. नाइटी पिंक कलर की थी और पतली पतली स्ट्रॅप्स थे काँधे पर और बहुत महिन थी, और मेनिका खुद को आईने में देख कर सोचने लगी के उसकी जिस्म सॉफ दिख रहा है…. उसको प्रतीक वेसे देखेगा!!! उसको शरम आने लगी और सोचने लगी के आइडिया ड्रॉप कर दे….. मगर प्रतीक तो आने वाला था, वो अब केसे उसको जाकर कहें नहीं आने को?!! मेनिका एक 18 साल की वर्जिन लड़की थी और प्रतीक उसस्के कमरे में आने वाला था उसस्के पाती के मदद करने के लिए सुहाग रात मानने के लिए…. पाती उसस्के साथ संभोग करेगा प्रतीक के हाज़िरी में?! हे भगवान यह सोच कर मेनिका के पूरे जिस्म के रोवणदते खड़े हो गये….. मगर मेनिका आपने पाती से संभोग करना चाहती थी…3 महीने हो गये थे और उसने कुछ नहीं किया था….. मेनिका चाहती थी के कुछ भी हो जाए एक बार कविता यूयेसेस से संभोग कर ले तो उसको सुकून आएगी…. मेनिका ने फिर सोचा के प्रतीक ने यूयेसेस से कहा था एतराज़ नहीं करने को अगर उसको उसे चूहना पड़ा तो…. तो मेनिका सोचने लगी के कहाँ छुएगा वो उसे, जिस्म को छुएगा? कहाँ छुएगा…..? मेनिका के जिस्म में एक कंपन हुई और एक ल़हेर दवदी उसस्के रागों में यह सब सोचते हुए….. वो खुद के जिस्म को आईने में देख रही थी और आपने प्रतीक को सोच रही थी के अभी थोड़ी देर में किया होने वाला है…. फिर वो कविता को जगाने लगी.

रात के बारह बजे थे जब प्रतीक ने मेनिका की बेडरूम को खोला. मेनिका कविता के बगल में लेटी हुई थी और कविता गहरी नींध में था, मेनिका की नाइटी उपर उठा हुआ था और उसकी खूबसूरात दूध की जेसे जांघें दिख रहे थे. प्रतीक के अंदर आते ही मेनिका झट से उठकर बैठ गयी. चेहरे पर लाली के साथ उसने आपने प्रतीक के चेहरे में देखा. कमरे के दीं बेडलांप जल रहे थे और प्रतीक आपने एँखहू को मेनिका की खूबसूरात जिस्म से नहीं हटता पा रहा था. मेनिका की नंगी बाहें, उसस्के आर्म्पाइट, काँधे पर पतली पतली स्ट्रॅप्स, और ब्रा भी नज़र अरहे थे, और वो सब देख कर प्रतीक के मॅन में कुछ हुआ!! मेनिका को अजीब लगा जिसस तरह से प्रतीक उसको देख रहा था तो यूयेसेस भादी तन्हाई को तोड़ने के लिए मेनिका ने बात किए;

“वो नहीं उठ रहा है अंकल जी, मैं ने बहुत कोशिश की.” यह मेनिका ने फुसफुसाते हुए कहा. बूढ़े को बहुत अच्छा लगा जिसस तरह से विस्पर में मेनिका ने यूयेसेस से बात किए, जेसे के वो उसका साथ दे रही थी शुरू से ही…. तब उसने आपने बêते को जगाने की कोशिश किए. बाप ने कविता को बहुत ज़ोर से झंझोर कर हिलाते हुए जगाया और वो मुश्किल से एँखहू को खोलते हुए देखा और आपने अंकल को आपने बेडरूम में देख कर चाहुंक गया. बेड पर कविता बैठा एँखहू को मस्सलते हुए और पूछा किया बात है. तो बाप ने कहा;

“बेटा आख़िर कब तक एसा चलेगा? तुम ने आज तक बहू को च्छुआ ही नहीं? क्यूँ? प्राब्लम किया है तेरा?” कविता को शरम आई और उसने सर नीचे झुका लिया. बाप ने बात पर बात किया मगर कविता ज़मीन पर नज़रों को गाड़े रखा , कोई भी जवाब नहीं दिया.

अंकल ने कहा; “देखो अगर तुमको शरम लग रहा है तो और समझ में नहीं आता के केसे शुरू करोगे तो मैं तुम को सीखता हूँ, मुझे देखो और जो मैं करूँ वेसा करो” अंकल ने मेनिका के बाँहो पर आपने हथेली को फेररा उपर से कलाई तक और कविता को वेसा करने को कहा. जब प्रतीक ने मेनिका के बाज़ू पर यूयेसेस तरह से हाथ फेररा तो मेनिका की जिस्म में एक आग जेसे लगी और आवाज़ को थामन्ते हुए एक हल्की सी सिसकारी ली उसने….. मेनिका थोड़ी घबराई हुई थी और उसका पूरा जिस्म तन्ना हुआ था यूयेसेस वक़्त. बहुत स्ट्रेस हो रही थी उससे. कविता ने वेसा ही किया जेसे उसस्के अंकल ने सीखया मगर उसका हाथ तर तर कांपता रहा जब तक यूयेसेस ने मेनिका के बाज़ू पर आपने हथेली को फेररा. उसस्के पसीने चूत पड़े और चेहरा लाल हो गया. तब प्रतीक ने मेनिका को आपने बिलकूल करीब बुलाया बेड पर. वो उसस्के पास गयी, बिलकूल करीब. तो प्रतीक ने आपने होंठों को मेनिका के गले पर फेररा हल्के से और कविता को वेसा करने को कहा. कविता ने किया बस थोड़ा सा… फिर काँपने लगा था.
तब कविता के अंकल ने मेनिका को आपने बाँहो लेकर उसस्के गाल पर किस किया, गले को चूमा और हल्के से आपने जीब को मेनिका के कान के पीछे फेररा और कविता को वेसा करने को कहा. मेनिका को यूयेसेस वक़्त आपने आप को प्रतीक को समर्पित कर देने को मॅन कर रहा था. मगर आपने आप पर काबू रखते हुए जिसस वक़्त प्रतीक आपने जीब को उसस्के कान के पीछे फेरर रहा था मेनिका ने कहा; “पिता जी, नहीं …..” तो प्रतीक ने कहा, “कोवापरेट करो प्लीज़ बहू मैं यह सब तुम्हारे भलाई के लिए कर रहा हूँ! देखना वो सीख जाएगा और तुमसे संभोग करेगा ”

कविता ने मेनिका को उससी तरह से बाँहो में लिया मगर बहुत ही काँप रहा था और पसीना पसीना हो गया था.

तब बाप ने पूछा; “केसा लग रहा है बेटा? अच्छाह लग रहा है? तेरा खड़ा हुआ ना?”

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कविता ने कोई जवाब नहीं दिया. अंकल ने बêते के शॉर्ट पर देखा के उसका खड़ा हुआ या नहीं मगर कुछ भी नहीं था सब फ्लॅट था…. तब अंकल ने मेनिका की नाइटी को उपर उठाया और उसस्के पूरी जांघें दिखने लगे, और अंकल ने मेनिका के जांघों को कविता को दिखाते हुए पूछा; “देखो बेटा किया यह सेक्सी नहीं है? देखो इससके कितने सेक्सी जांघें हेँ बेटा, तेरी बीवी बहुत ही सेक्सी है कविता बेटा.” और खुद अंकल का लंड खड़ा हो गया मेनिका के खूबसूरात जांघों को देख कर और मेनिका को सब दिखा. उसने देखा के उसस्के प्रतीक का खड़ा हो गया उसस्के कपड़े के अंदर ही…… प्रतीक को आज पहली बार मेनिका की जांघों के वह हिस्से नज़र आए जो हमेशा छिपे रहते थे इतने दिनों से वह हिस्से कितने खूब सूरात ज़ियादा सफेद रंग के यूयेसेस में गुलाबी रंग का मिलावट भी थे, गड्राए, हॉट सेक्सी जांघें…. प्रतीक के मुँह में पानी आगेया….. यूयेसेस ने जांघों पर आपना हाथ फेररा, धीरे धीरे, हल्के हल्के, उपर तक हाथ बढ़ाता गया मेनिका के नाइटी के नीचे भी…. मेनिका ने आपने जिस्म को सीधा करते हुए प्रतीक के हाथ को आगुए बढ़ने से रोका…. तो प्रतीक ने पूछा; “क्यूँ तुमने आपनी ब्रा नहीं निकली है मेनिका? प्लीज़ उतार दो ब्रा को उसको एग्ज़ाइट करने के लिए, यह इंपॉर्टेंट है बेटी…….”

तो प्रतीक ने पूछा; “क्यूँ तुमने आपनी ब्रा नहीं निकली है मेनिका? प्लीज़ उतार दो ब्रा को उसको एग्ज़ाइट करने के लिए, यह इंपॉर्टेंट है बेटी…….” यूयेसेस अग्यह की पालन करने को मेनिका को बहुत ही अजीब लग रहा था. जिस्म काँप उठी उसकी और चेहरा एक दूं से लाल हो गया, लाज से प्रतीक के चेहरे में देखा मेनिका ने. कविता ने सर झुका लिया और बेड को देखने लागा. प्रतीक ने प्यार से कहा; “सूणों मेनिका बेटी, देखो वो बहुत शर्मा रहा है, नर्वस भी है, तुम ने कहा था के कूरपेराते करोगी तो करो ना! बस यूँ समझो के मैं यहाँ नहीं हूँ सिर्फ़ तुम्हारा पाती यहाँ है; निकाल दो ब्रा को बेटी, कविता बहुत खुश होगा, है ना बेटा?”

मेनिका ने आहें भराते हुए उन्न दोनों मर्दों से आपने पीठ करके आपने ब्रा को निकल दिया. जब वो निकाल रही थी आपनी ब्रा को तो रणजीत के अंकल मेनिका की नंगी पीठ देख रहा था और उसका खड़ा हो गया वो देख कर. और मेनिका ने वापस मूधकर प्रतीक को देखते हुए पूछा, “अब किया अंकल जी?” प्रतीक ने मेनिका को आपने करीब लाया और कविता को भी. उसने कविता के हाथ को आपने हाथ में लेकर मेनिका के चुचियों के उपर रखा नाइटी के उपर ही और कविता के हथेली से मेनिका के बूब को ज़रा सा मास्सला हल्के से….. कविता को शरम आई और यूयेसेस ने आपने हाथ को खींच लिया. कविता के अंकल मेनिका के ज़ियादा करीब गया, उसस्के पयर मेनिका के जांघों से टकरा रहा था जिसस से उसका लंड हरकत कर रहा था और वो आपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था इतनी खूब सूरात जवान बहू को एसी सेक्सी नाइटी में बिना ब्रा के आपने इतने करीब पाकर.

प्रतीक ने आपने उंगली से हल्के से मेनिका के काँधे से एक स्ट्रॅप को नीचे सरकया और मेनिका की चुचियों के थोड़े नज़र आने लगे. तो बाप ने कविता के तुड़ी को उपर उठाकर वो नज़ारा दिखाया. और उससी वक़्त बाप ने आपने हथेली को मेनिका के काँधे से हल्के से फेररेते हुए उसस्के बूब तक फेररा और बêते को देखते रहने को कहा.

तब तक मेनिका को उतेज़ीना महसूस होने लगी और उसका शरीर काँप उठा और उसको समझ में नहीं आया के केसे यूयेसेस हालात का सामने करें. और प्रतीक ने मेनिका की नर्म मुलायम बूब को आपने सख़्त किस्सन वाले हाथ से च्छुआ, करेस किया, जवान वर्जिन 18 साल की आनच्छुई बूब को प्रतीक करेस कर रहा था और बेटा देख रहा था….. मेनिका से सहा ना गया और उसने आपने सर और जिस्म को झुख कर च्छुपाना चाहा…. और कविता ने आपने चेहरा एक तरफ कर लिया.

प्रतीक के समझ में नहीं आया अब केसे अगुए बढ़े…. तो कड़क आवाज़ में आपने बêते से कहा; “तुम को कुछ नहीं महसूस हो रहा बेटा?” कविता बिलकूल खामोश था और ज़ियादा काँपने लगा था और बहुत पसीना छूटने लगा थे उसका. तो मेनिका ने कहा; “पिता जी, रहने दीजिए, वो रेस्पॉंड नहीं करेगा वो तो एसा ही है आप को पता है, कोई उमीद नहीं मेरे ख़याल से अब.” मगर अंकल हार मानने वाला नहीं था. उसने मेनिका को बिस्तर पर लेत्ने को कहा और कहा के एक आखरी चान्स लेगा कविता की उतेज़ीना को जगाने के लिए. मेनिका गरम हो चुकी थी मगर उसस्के समझ में नहीं अरहा था के प्रतीक से किया कहें…उसको आपने आप को संभालना बहुत मुश्किल पर रहा था, वो चाहती थी के अब प्रतीक वापस चले जाएँ ताके वो आपने मॅन और जिस्म में बसे आग को ठंडा कर सके…मगर प्रतीक तो आग और भी भड़का रहा था उसको बेड पर लेटा कर!!

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मेनिका लेट गयी बेड पर आपने प्रतीक के बगल में… और प्रतीक मेनिका के उपर चढ़ा और उसस्के गले को चूमा कविता को देखाते हुए, और आपना मुहन को प्रतीक ने मेनिका के चुचियों के तरफ बढ़ाया, और कविता को बिलकूल वेसा ही करने को कहा. मेनिका जेसे बलि की बकरी बननी हुई थी यूयेसेस वक़्त बाप और बêते के बीच. जब प्रतीक वो आक्षन कर रहा था तो मेनिका बहुत मुश्किल से आपने भावनाओं को काबू में कर रही थी, आपने जिस्म की आग को ना भड़कने की बहुत कोशिश कर रही थी…. जब प्रतीक के होंठ उसकी काँधे की मुलायम स्किन को चुवा और वहाँ से आहिस्ते आहिस्ते प्रतीक के होंठ उसस्के चुचियों तक बढ़ा फेररेते हुए तो मेनिका बेकाबू हो गयी और सिसकारियों के साथ उसकी जिस्म बेड पर थरथराई और चादर को आपने मुठियों में ज़ोर से जाकर लिया मेनिका ने और ज़ोर से हफफने लगी थी…. मेनिका खुद को गीली होते महसूस करने लगी थी…. प्रतीक ने उससी वक़्त एक हाथ से मेनिका की नाइटी को जांघों के बिलकूल उपर उठाया और मेनिका की पेंटी नज़र आने लगी थी, और मेनिका ड्रेस को नीचे वापस करके आपने पेंटी और जांघों को कवर कर रही थी हनफफ्टे हुए….. प्रतीक का तन्ना हुआ लंड मेनिका के पेत के नीचे हिस्से से टकराया और मेनिका ने आ भराते हुए गहरी साँस लिया उसको आपने जिस्म पर महसूस करके….

तब अंकल मेनिका पर से एक तरफ हट गया बेड पर और कविता को बिलकूल वेसा करने को कहा जेसे उसने अभी किया मेनिका के साथ. वो तो काँप रहा था, पसीना पसीना हो गया था, फिर भी बेचारे बे बाप के ड्ऱ से वो सब करने की कोषिहस किया…. मगर जेसे ही उसका शरीर मेनिका के शेयरर से टकराया तो कविता को जेसे करेंट का झटका लगा और वो कूदकर बेड से उतरा और जल्दी से बेड के नीचे घुस्स गया जेसे एक बचा क़िस्सी चीज़ से ड्ऱ कर च्छुपता है. मेनिका के एँखहू से एनसू बहने लगे वो देख कर और उसने आपने चेहरे को तकिये में चुपा लिया. अंकल को बहुत घुस्सा आया और घुस्से में ही थोड़ा चिल्लाते हुए कहा;

“केसा लुच्चा बेटा है तू? आबे मैं तेरी पत्नी को चोदने वाला हूँ और तू पलंग के नीचे चुप रहा है?” कविता ने पलंग के नीचे से कहा;

“पिता जी आप मेनिका को लेलो, उससे आपना लो, वो आप की हुई, आप ही मेरी जगह जो करना है कर दो! मुझसे नहीं होगा, मेरा आज तक कभी खड़ा नहीं हुआ है, मैं ना मर्द हूँ अंकल जी!”

मेनिका और उसस्के प्रतीक दोनों को ज़बरदस्त झटका लगा कविता के जवाब सुनकर और दोनों एक दूसरे के चेहरे में देखते रहे खुले हुए मुहन से!!!

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