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शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 5 )
Date : June 20, 2015, 11:54:14 PM
Languages : Hindi
PageView : 000010757
Categoreies : Hindi Long Sex Stories
शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 5 )

Shaadishudaa Aurat Ki Kahani - Part 5

फिर मेनिका रोने लगी और प्रतीक ने उसस्के सर और पीठ पर हाथ फेररेती हुए उसको चुप करने की कोषिहस किया. प्रतीक ने मेनिका को आपने बाँहो में भर लिया प्यार से और मेनिका ने आपना चेहरा प्रतीक के नंगे छाती में चुपा लिए रोते हुए…. फिर धीरे धीरे आपने बहू को करेस करते हुए प्रतीक ने मेनिका को लेटया, उसस्के सर पर हाथ फेररेती हुए, हौसला देते हुए, उसस्के गाल को चूमा, जेसे एक बचा रोता है तो उसको फुससलते हुए शांत करते हेँ वेसे ही प्रतीक मेनिका को शांत करा रहा था उसस्के जिस्म पर हाथ फेररेती हुए….. मेनिका सिशकरही थी, प्रतीक उसस्के एनसू पोंछ रहे थे और उसस्के एनसूओं को आपने होंठ से प्रतीक पोंछ रहा था, आपने होठों को मेनिका के गाल पर फेर रहा था, और तब प्रतीक ने आपने होंठ को मेनिका के होंठ पर रखा और मेनिका ने आपनी मुँह खोल दिया और आपने प्रतीक को किस करने लगी…… दोनों ने एक दूसरे को बहुत पॅशनेट्ली किस किए काफ़ी देर तक, एक लंबी किस थी वो….. फिर मेनिका ने प्रतीक को बहुत ज़ोर से आपने बाँहो में भर लिया और उसस्के काँधे पर आपने दाँतों को दबाने लगी और चुस्सने लगी आपने प्रतीक के शरीर को…… मेनिका से संभाला नहीं जा रहा था अब….. प्रतीक ने धीरे से आपनी बहू की नाइटी नो निकालने लगा और मेनिका ने निकालने के लिए पोज़िशन दिए प्रतीक को…. फिर सब कुछ बहुत जल्दी जल्दी होने लगा…एसा लगा दोनों बहुत प्यासे थे बरसों से और पल भर में दोनों बिलकूल नंगे हो गये और प्रतीक मेनिका को चोदने लगा….

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मेनिका कुँवारी थी, वर्जिन थी और प्रतीक को एक 18 साल की जवान कुँवारी चुत मिल गयी सील तोड़ने को आपने बêते के बेडरूम में, बêते के बिस्तर पर. सुहाग रात आख़िर में प्रतीक ने मनाया आपनी बहू के साथ.

मेनिका खुशी और दर्द के साथ ज़ोरों से हंफफने लगी, जिसस पल की वो इंतेज़ार कर रही थी 3 महीनों से आज उसकी वो हसरात पूरी हुई, उसकी जिस्म में एक माले ऑर्गन घुस्सा और उसकी सील टूटी जिसस से मेनिका को बहुत खुशी हुई और सुकून मिला. और ज़ियादा खुशी की बात मेनिका को यह हुई के उसको बहुत अच्छा ऑर्गॅज़म हुआ, जिस्म में थरातर्री आगाई जिसस पल झड़ने लगी थी, आपने प्रतीक के लंड बहुत खुशी से मेनिका ने स्वीकार किया बलके उसकी चुत ने बड़ी आसानी से प्रतीक के लंड का स्वागत किया और मेनिका के पूरे जिस्म में बहुत खुशी और आराम मिली प्रतीक के यूयेसेस चुदाई से.

दोनों ने कविता को बिस्तर के नीचे खराते लेते हुए सुना. दोनों प्रतीक बहू ने एक दूसरे को बाँहो में लेकर लेट गये; और अंकल को एक किस्म का स्वाभिमानी, प्राइड, फील हुआ के उसने एक जवान वर्जिन को इस उम्र में खुश किया, उसको प्लीज़ किया…..

“अब चादर पर खून के ढाबे आ गया, अब सबको मेनिका और उसस्के प्रतीक बिस्तर के चादर दिखा सकेंगुए खुशी से और रिश्तेदार के औरातें अब बाकी के परंपरा को पूरा कर सकेंगुए” एसा सोचते हुए दोनों को नींध लग गये, आराम, सुकून और खुशी से भरे नींद…… मेनिका बहुत ही खुश थी, उसस्के सर से एक बहुत बड़ा बोझ उतार गाया जेसे…….. यूयेसेस वक़्त मेनिका को इससका कोई फिकर नहीं थी के उसने किस के साथ संभोग किया, उसको इस बात की खुशी थी के उसने सुहाद रात मनाई क़िस्सी भी हालत में उसकी सील टूटी और उसने सेक्स किया और एंजाय भी किया मज़ा भी आया और खुशी भी मिली और सबको मुँह भी दिखा सकेगी और क़िस्सी को कुछ पता भी नहीं चलेगा!!

आपने और आपने प्रतीक के साथ यूयेसेस तालुकात के बड़े में रणजीत को बतने के बाद मेनिका रोने लगी और ज़मीन पर बैठ गयी. रणजीत ने सारे बयनात घौर से सुने, और हालान के मेनिका वेसे मुश्किल दौर से गुज़री थी, सब सुनते हुए और सुनने के बाद रणजीत बहुत एग्ज़ाइटेड हुआ और उसका जमके खड़ा हो गया. उसको सब बहुत ही एरॉटिक और एग्ज़ाइटिंग लगा बहुत उतेज़ीना हुआ उसको.

जब मेनिका रो रही थी तो रणजीत भी नीचे बैठ गया आपने सर को दोनों हाथों में थामे! यूयेसेस पल कमरे में एक ठाना हुआ भादी और बोरिंग वातावरण था. सब शांत थे. तकरीबन 15 मिनिट्स तक दोनों चुप छाप बिना कोई बात किए वेसे ही खामोश बैठे रहे. रणजीत मेनिका की कही हुई उन्न सब दृश्तों को आपने एँखहू के सामने जेसे देख रहा था रीवाइंड कर कर के. और यूयेसेस ने सोचा और समझ गया के उससी तरह से मेनिका को हर रात उसका अंकल चोदने लग गाया और तब से शायद मेनिका को भी आदत हो गयी क्यूंके उसको वो खुशी देने वाला कोई और था ही नहीं. तो इसी लिए मेनिका हर रात आपने प्रतीक के कमरे में जाती है और दोनों आपने जिस्म की आग को शांत करते हेँ.

रणजीत को समझ में नहीं अरहा था के अब किया कहें और केसे मेनिका को आप्रोच करें. हालात कुछ गंभीर लग रहा था उससे. मगर अब वो मेनिका को और भी चाहने लगा और सेक्स माइंडेड भी हो गया मेनिका को लेकर शायद पहले से और भी ज़ियादा, क्यूंके अंकल के साथ तो मेनिका कर रही थी तो रणजीत ने सोचा अब तो ज़ियादा आसान हो गया उसको मेनिका को पाने के लिए. थोड़ा सा मतलबी भी बन गया और सोचा के अब अगर मेनिका उसको खुश नहीं करेगी तो वो मेनिका को उससी की किए गये गुनाह को इस्तेमाल करके उसको एमोशनली ब्लॅकमेल भी कर पाएगा. मगर उसस्के दिल में सच में मेनिका के लिए प्यार भी था तो शायड ब्लॅकमेल करने की ज़रूरात नहीं पड़ेगी अगर मेनिका भी सच में उसको चाहती है तो एसा भी सोचा रणजीत ने. फिर भी रणजीत सोचता रहा आख़िर क्यूँ इतने दिनों तक मेनिका उसकी प्रपोज़ल को ठुकराती रही जबके खुद यह सब करने लगी थी? यह सवाल रणजीत को परेशान किए जा रहा था. किया अब मेनिका खुद को रणजीत के हवाले करेगी? अब केसे रणजीत मेनिका के तरफ बढ़ेगा जबके मेनिका ने अभी काफ़ी दर्द बहरे हालात को बयान किया?

कमरे की शांति को भंग करते हुए रणजीत बोला जब उसने देखा के मेनिका ने रोना बंद कर दिया है;

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“अछा तो यह बताओ भाभी, तुम पिछले 4 महीनों से अंकल जी को खुश कर रही हो, और कविता भाई को इसस्सका पता है ना? मेनिका ने गहरी साँस लेते हुए कहा;

“तुम्हारा भाई किस तरह से सोता हाई तुमको मुझसे बेहतर पता होगा ना? उसको एक बार भी पता नहीं के मैं कमरे से निकल कर अंकल जी के कमरे में जाती हूँ. हाँ अंकल जी यूयेसेस पहली रात के बाद हर रात को मुझे आपने कमरे में आने को कहा. और सच कहूँगी मुझे सब पस्संद आने लगा तब अंकल जी के साथ, मुझे उसकी ज़रूरात महसूस होने लगी और मैं खुद ना चाहते हुए भी सब एंजाय करने लगी धीरे धीरे, किया कराती मैं? आख़िर मैं भी इंसान हूँ और ज़रूरातें हेँ मेरी भी….. और एक सच बात बताउन तुम्हारे अंकल जी बहुत मज़बूत है और मुझको बेहद खुश कराता है वो उसस्के उम्र के बावजूद वो पक्का मर्द है अब भी! वो पहला मर्द है जिसस ने मुझको पीनेटरेट किया और मुझको एक औरात होने का एहसास दिलाया, उसने मुझको एक मुकम्मल औरात बनाया, और मुझे खुद आपने आप को उससे सोम्प देने का मॅन करने लगा हर बार यूयेसेस रात के बाद. मैं रात का इंतेज़ार करने लगी और यूयेसेस के पास जाने और संभोग करने का बेसब्री से इंतेज़ार करने लगी हर रात को….. और तेरे अंकल जी को आपना मर्द समझने लगी मैं तब से!”

रणजीत ने मेनिका को दिल लगा के अछी तरह से सुना और उसस्के पास जवाब नहीं रहा मेनिका को दे नेके लिए. कुछ कहने लायक नहीं चोर्रा मेनिका ने उसको. वो खड़ा हुआ और आपने अंकल के बड़े में सोचने लगा. रणजीत कमरे से निकालने लगा तो मेनिका उसस्के पीछे तेज़ कदमों से गयी और पीछे से रणजीत का हाथ ज़ोर से पककर कर कहा, “प्लीज़ मत जाओ, प्लीज़… किया यह मेरा कुसोस्स्र है के तुम मुझे अब चोर्र जाओ? हालात एसे हो गये थे के मुझे वो सब करना पड़ा अब तो समझो तुम!”

रणजीत मुस्कुराया और उसको मेनिका पर तरस आया, तो उसने कहा;

“फिकर मत करो भाभी मैं कहीं नहीं जा रहा, और नहीं ज़ाऊगा. मैं तो बाहर हवा खाने जा रहा हूँ, दूं घुटने लगा इस कमरे में अब!” यह कहकर रणजीत ने मेनिका को आपने बाँहो में ज़ोर से जाकरा. तो मेनिका की जान में जान आई और एक लंबी साँस चोर्री यूयेसेस ने आपने सर को रणजीत के सीने पर चिपकाते हुए. दोनों एक दूसरे को बाँहो में जकरे खड़े थे, एक दूसरे के जिस्म की गर्मी को महसूस कर रहे थे और रणजीत ने आपनी भाभी के माथे को चूमा, फिर उसस्के गालों को चूमा और फिर उसस्के हूतों को….. मेनिका ने इस बार विरोध नहीं किए…. और रणजीत के किस को रेपोन्ड किए और खुद किस किया यूयेसेस ने भी रणजीत को…. और जब रणजीत ने देखा के मेनिका माना नहीं कर रही है तो उसने उसस्के गले को किस किया, फिर धीरे धीरे नीचे मेनिका के चुचियों के तरफ होंठ फेरर्टा गया चूमते हुए…. मेनिका ने ज़ियादा ज़ोरों से रणजीत को बाँहो में जाकरा, लंबी साँस चोर्री, और उसस्के साँसें तेज़ होने लगे तो फुसफुसाते हुए मेनिका ने कहा, “प्लीज़ चोररो मुझे अब, चोररो ना प्लीज़ मैं बहेक जौंगी, मुझसे कंट्रोल नहीं हो पाएगा रणजीत, प्लीज़ चोररो ना सस्स्स्स्शह”

मगर रणजीत और भी ज़ियादा करेस और किस करते गया आपने प्यारी खूब सूरात, जवान भाभी को….. और उसस्के हाथ मेनिका के पीठ से लेकर गान्ड तक फेररेती हुए मस्सलता गया किस के दौरान…. और मेनिका को रणजीत ने उठा लिया उससी पोज़िशन में, मेनिका के पावं ज़मीन पर नहीं थे उपर थे क्यूँ के प्रणविंद्रा ने उसको बाँहो में जकरे हुए उठाया हुआ था, मेनिका का पूरा जिस्म रणजीत के जिस्म से लिपटा हुआ रणजीत के बाँहो में क्वेड, और रणजीत के होंठ उसके जिस्म पर चारों तरफ फेर रहे थे चुम्मते हुए….. और चल कर रणजीत आपने कमरे तक गया और मेनिका को आपनी बिस्तर पर लेटया…..

मेनिका की दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो गये थे और साँसें और भी ज़ियादा तेज़ चल रहे थे; वो बिस्तर से उतरी और कहा;

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“नहीं रणजीत, यह ठीक नहीं है, सही नहीं है यह रणजीत….” और वो कमरे से बाहर भाग गयी. रणजीत बेड पर बैठा रहा आपने चेहरे को आपने हाथों में लिए कुछ देर तक. फिर लेट गया बेड पर एक लंबी साँस चॉर्राते हुए, उसका बिलकूल खड़ा हो गया था!

आधे घंटे के बाद रणजीत रसोई में गया जहाँ मेनिका बर्तन मांझ रही थी सींक में. एक टू पीस में ड्रेस्ड थी मेनिका, उसकी कमर दिख रहे थे और बाल खुले हुए थे…. धीरे से हवा चल रही थी पास की खुली खीरकी से और मेनिका के बाल उध कर कभी दाएँ तो कभी बाएँ हो रहे थे जिसस से कभी उसकी कमर धाँक जाती थी और फिर नज़र अरहे थे, पीछे से रणजीत यह नज़ारा देख कर एग्ज़ाइट हो गया और उसका लंड हरकत में आगेया…. रणजीत को पीछे से ही मेनिका को ज़ोर से बाँहो में लेने का मॅन किया दोबारा…. मेनिका को उसकी मौजूदगी महसूस हुई तो मूधकर उसको देखा, मुस्कुराइ और बैठने को कहा. जो माहौल पहले था वो मिट चक्का था और अब दोनों बेहतर फील कर रहे थे और दोनों ने बात चीत करना शुरू किए. बहुत बातें किए गये, एक घंटे टॉक बातें हुई, मगर सेक्स की बातों को चोर्र कर. दोनों फिर से पहले की तरह बात करने लगे जेसे के कुछ हुआ ही नहीं था, रणजीत ने काई जोक्स भी सुनाए मेनिका को और वो खूब खुल कर हँससी भी….. माहौल को बिलकूल बदल दिया गया वेसे बातों से, हल्का फूलका महसूस करने लगे दोनों और आराम और सुकून मिले दोनों को पहले की तरह…. और आख़िर में बात यह पूछा रणजीत ने;

“कितनी बार अंकल जी के साथ खेत गयी हो तुम?”

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