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शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 6 )
Date : June 20, 2015, 11:54:55 PM
Languages : Hindi
PageView : 000010680
Categoreies : Hindi Long Sex Stories
शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 8 )

Shaadishudaa Aurat Ki Kahani - Part 8

यूयेसेस दिन के यूयेसेस पठार पर कपड़े ढोने वाले पास के एनकाउंटर के बाद रणजीत और मेनिका एक लविंग कपल की तरह दिन भर घर में रहे. लगता था दोनों पाती पत्नी हेँ. दोनों साटन साथ रहते, मज़ाक करते, हाथों से खेलते, छेद छानी करते, और जब बाकी के लोग घर पर होते तो एक दूसरे को दोनों चुप चुप कर नज़रें चुराते हुए देखते दूसरों से नज़रें बचाते.

एक बार जब मेनिका किचन में स्टोव के पास थी तो, रणजीत ने वहाँ से गुज़राते वक़्त आपने हथेली को मेनिका के गान्ड पर फेररेते हुए गुज़रा. मेनिका ने मुस्कुराते हुए चारों तरफ देखा के क़िस्सी ने देखा तो नहीं और जब देखा के प्रतीक कुछ पढ़ रहा है उधर ही तो मेनिका ने रणजीत को मोटे मोटे एँखहू से देखा और इशारों में कहा के क्यूँ उसने वेसा किया जब सब वहीं पर हेँ! और रणजीत मेनिका के तरफ एक तारक भाड़े स्माइल देते हुए वहाँ से खिस्सका.

फिर वक़्त हुआ टीवी देखने की और सब लाउंज में एकते थे कविता के साइवा. वो हमेशा की तरह सोने चला गया था, टीवी तो कभी देखता ही नहीं था वो. एक थ्री सीट वाले सोफे पर मेनिका, उसस्के प्रतीक और रणजीत तीनों बैठे टीवी देख रहे थे. मेनिका बीच में बैठी थी और उसस्के दोनों बगल में एक तरफ प्रतीक तो एक तरफ पाती का छोटा भाई बैठा था. अब प्रतीक हमेशा उसको च्छुटा था टीवी देखते वक़्त इसी लिए मेनिका उसस्के पास बैठती थी क्यूँ के एसा प्रतीक ने कहा था उससे आपने पहले दिन वाले अफेर के बाद. तभी से मेनिका उसस्के पास बत्ती है और प्रतीक आपने हाथों से काम कराता रहता है मेनिका के जिस्म पर. इस दिन से पहले रणजीत कभी भी नहीं बैठा था मेनिका के साथ एक ही सोफे पर. और पहले कभी भी रणजीत ने आपने अंकल और मेनिका के बीच कुछ भी नहीं नोटीस किया था कभी क्यूंके वो कभी भी आपने अंकल के तरफ लाउंज में देखने की हिमत नहीं कराता था. और टीवी देखते वक़्त हमेशा लाइट ऑफ रहता था लाउंज में, सिर्फ़ टीवी की स्करीन वाले लाइट होते थे.

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तो मेनिका को पहले से पता चल चक्का था के आज तो दोनों मर्द उसको च्छुएंगुए. वो एक ड्रेस में थी जो उसस्के घुटनों तक रीच होता था और डीप व कट वाला ड्रेस था और स्लीवलेशस भी था ड्रेस. उसस्के बैठने से ड्रेस थोड़ा सा घुटनों के उपर उठ गया था और उसस्के घुटनों के ठीक उपर वाले हिस्से, जाँघ की शुरूवात दिख रहे थे जो थोड़ा ज़ियादा गोरे थे…. ड्रेस डार्क ब्लू रंग के थे जिसस से उसकी जांघें कॉंट्रास्ट कर रहे थे यूयेसेस ड्रेस में गोरी जांघें और डार्क ब्लू ड्रेस… बहुत ही अट्रॅक्टिव लग रही थी…कोई भी उसस्स वक़्त उसकी जांघों की यूयेसेस थोड़ी सी बिगिनिंग को देख कर ही लंड नहीं संभाल पाता! रणजीत मेनिका के रिघ्त में था और प्रतीक लेफ्ट साइड में बैठे थे. फिर भी और जगह थे सोफे पर क़िस्सी को बैठने के लिए हालान के 3 सीट का सोफा था. रणजीत की फॅंटेसी जागा उसस्के मॅन के अंदर और यह सोचने लगा के वो आपने अंकल के हेल्प से मेनिका की ड्रेस को उपर उठा रहा है…. सिर्फ़ एसा सोचने से उसस्के पेंट में ऊँचाई होने लगा लंड के उठने से…. मेनिका ने उसस्के ऊँचाई को नोटीस किया और हल्के से हथेली से मारा यूयेसेस पर मुस्काटे हुए. मेनिका हँससी और आपने हूतों को दाँतों में दबाया रणजीत के लंड पर मारने के बाद.

और चाँद मिनटों के बाद रणजीत के अंकल ने आपना हाथ रखा मेनिका के गोड में. मेनिका खामोश रही और जानने की कोशिश किया के किया रणजीत ने आपने अंकल का हाथ को नोटीस किया के नहीं….. वेसे हर रात को अंकल मेनिका को जी भर के करेस कराता था टीवी देखते वक़्त क्यूँ के सिर्फ़ वह दोनों बैठते थे एक सोफे पर, रणजीत तो एक दूसरे सोफे पर बैठता था हमेशा वो भी उन्न दोनों के सामने तो कभी भी उससो कुछ नहीं दिखता था. प्रतीक ने आहिस्ते से मेनिका के ड्रेस को थोड़ा सा उपर किया और बार बार उसकी जांघों पर नज़रें कर रहा था… फिर बूढ़े ने हाथ को थोड़ा अंदर किया और मेनिका की पेंटी पर उंगलियाँ चल्आअनए लगा हौले हौले, ड्रेस के नीचे से…

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मेनिका ने आपने हाथ को उसस्के हाथ पर रखा ड्रेस के उपर से ही ताके रणजीत को प्रतीक की उंगलियों के मूव्मेंट्स नहीं दिख सके. मगर अंकल ने कंटिन्यू किया और उसका खड़ा हो गयेा तो मेनिका का हाथ धीरे से खिंचा आपने लंड पर रखने के लिए…. मगर मेनिका हिचकिचा रही थी रणजीत के तरफ देखते हुए…. और रणजीत को नज़र आ ही गया…. रणजीत एग्ज़ाइट हो गया क्यूंके अब तो उसको मेनिका को चूड़ते हुए देखने में मज़ा आने लगा था…. उसको उतने साल के उम्र के लोगों से मेनिका को चोदते हुए देखने में पता नहीं क्यूँ बहुत मज़ा आता था…. रणजीत क़िस्सी और आधेर या बूढ़े आदमी से मेनिका को चोदते हुए देखना चाहता था… उसको लगता था के मेनिका की जवान जिस्म आधेर आदमियों को बहुत ही मज़ा देता है और खुद मेनिका बहुत एंजाय कराती है… क्यूँ रणजीत को एसा लगता था पता नहीं, शायद उसने आपने अंकल के साथ मेनिका को ऑर्गॅज़म पाअतए देखा और एंजाय करते देखा और मेनिका ने खुद उसस्के चाचा वाले बात को बताया इस लिए रणजीत को लगता था के मेनिका आधेर आदमियों से चुदयाना बहुत पस्संद कराती है…. वो थी 18 की प्रतीक था 55 के और प्रतीक का भाई 54 के… तो 3 बार उसस्के उमर से ज़ियादा के लोग चोद रहे थे उसको और मेनिका एंजाय कराती थी कमाल है वा!! सोचने की बात है…. जब मेनिका पैदा हुई होगी तब रणजीत के बाप की उमर 36 की हुई होगी, मतलब तभी 2 बार उसकी उमर का था वो, आपने से 3 बार ज़ियादा उमर में बड़ा आदमी से चुदवाने में केसा लग रहा होगा मेनिका को वोही जाने….यह रणजीत सोच रहा था…… रणजीत के फनतैईसीएस बढ़ते जा रहे थे मेनिका को लेकर अब …. वो मेनिका को क़िस्सी से भी कुछ भी करने को देखना चाहता था…. और रणजीत यूयेसेस वक़्त जान बुझ कर लाउंज से निकल गया आपने अंकल को आसानी से मेनिका के साथ एंजाय करने के लिए. अब रणजीत के समझ में नहीं आ रहा था के कहाँ से उन्न दोनों को देखे…..

यूयेसेस ने सोचा एक ही तरीका है उन्न को देखने को…वो था बाहर से…. वो बाहर गाया लाउंज में झाँकने के लिए मगर परदा खींचा हुआ था तो कुछ नहीं नज़र अरहे थे, तो वो फिर से अंदर गया मगर यूयेसेस सोफे पर नहीं बैठा, क़िस्सी दूसरे जगह बैठा जो खीरकी के पास था, और उसने धीरे से पर्दे को ज़रा सा खींचा बस एक पतली सी जगा चॉर्र्ने के लिए ताके उसको बाहर से अंदर दिख सके. और उसने कहा के अब वो सोने जा रहा है.

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तब रणजीत बाहर गया और यूयेसेस जगा से लाउंज के अंदर देखना शुरू किया. अब आपने अंकल को आपनी भाभी के साथ एंजाय करते हुए बहुत अच्छी तरह से देख सकता था जो छोटा सा जगह बनाया था खीरकी के पर्दे को हटता कर बिलकूल ठीक था उन्न दोनों को देखने के लिए.

और लाउंज में जब अंकल ने सुना के रणजीत सोने छाला तो उसने आपना मुँह मेनिका के ड्रेस के अंदर डाल चक्का था उसस्के जांघों को चाटने के लिए मेनिका की नर्म, मुलायम जांघें जिसकी हल्की गर्मी से प्रतीक के गाल से दबाते हुए बहुत मज़ा अरहा था…. यही दिखा रणजीत को बाहर से जब वहाँ रीच हुआ तो. उसस्के अंकल का सर नहीं दिख रहा था उसे क्यूंके सर मेनिका के गोड में उसस्के ड्रेस के नीचे था. रणजीत का बिलकूल खड़ा हो गया वो देख कर ऑरा आपने हाथ को उसने आपने लंड पर रखा अंदर का खेल देखते हुए….. रणजीत के अंकल ने मेनिका के दोनों टाँगों के थोड़ा फेयलाया और उसकी चुत को, पेंटी के उपर से ही होंठ दबाते हुए चूमने लगा. मेनिका की पेंटी पर एक भीगी हुई ढाबा आगाए थे थे तब तक हॉट स्पॉट पर. और प्रतीक ने आपनी बहू की पेंटी को आहिस्ते आहिस्ते नीचे करना शुरू किया चुत को चूमते हुए…… घुटनों तक पेंटी को खींच दिया था तो मेनिका बोली; “यहीं तक रहने दो अंकल जी कहीं रणजीत वापस ना अजए!… अगर आए तो मैं जल्दी से उपर खिंच पौँगी पेंटी को….” तो पेंटी को वहीं घुटनों तक चोर्रा गया और प्रतीक उसकी चुत का रस्स पीने लगा चाटते हुए और मेनिका के हाथ में प्रतीक का मोटा लंड था जिससपर वो हाथ चला रही थी बिलकूल जेसे मूठ माराते वक़्त चलाते हेँ… मेनिका एक्सपीरियेन्स्ड हो गयी थी उसको मर्दों को खुश करना आगेया था इतने दिनों में…. 5 महीनों में….

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जितना प्रतीक उसस्के चुत की सेन्सिटिव हिस्सों को जीब लगा रहा था उतना ही ज़ोरों से मेनिका लंड रगढ़ रही थी आपने हाथ में….. यह सब देख कर रणजीत को भी मूठ मारने का मन कर रहा था, उसका जमके बिलकूल खड़ा था…. मेनिका ने झुक कर प्रतीक के गले को छाता और दाँत काटा….. मेनिका की वेसा करने से प्रतीक की एग्ज़ाइट्मेंट दुगना हुआ…. फिर एक पल बाद प्रतीक ने मेनिका को आपने गोड में बिठाया, और आपने लंड को उसकी चुत में डाला… पेंटी निकाल दी गयी फाइनली और मेनिका को उठक बैठक करना पड़ा लंड के उपर जो चुत के अंदर थे…. प्रतीक ने मेनिका के कमर को पकड़ा और उसकी व कट पर आपने मुँह डाला उसकी चुचियों को चुस्सने के लिए जो ब्रा में नहीं थे बस वेसे लटके हुए थे ड्रेस के अंदर…. प्रतीक मेनिका की बूब्स को चाट्ता चुस्सटा गया, उसका लंड मेनिका की चुत के अंदर, मेनिका उपर नीचे उछाल रही थी और प्रतीक उसकी चुचियों को चुस्से जा रहा था…. फिर प्रतीक भी आपने टोस पर ज़ोर देते हुए कमर को थोड़ा उठाकार धक्का देने लगा मेनिका के उपर नीचे होने के साथ साथ….उसस्के ढके, मेनिका के उठक बैठक लंड को रफ़्तार से अंदर बाहर किए जा रहे थे जिस से मेनिका हंफफने लगी थी और उसकी सिसकारियाँ लाउंज में घूनजने लगे थे….. मेनिका को बाँहो में जाने की ज़रूरात महसूस हुई और झट से आपने दोनों बाँहो को प्रतीक के कांधों पर लपेटा और प्रतीक के मुँह को आपने मुँह में लेकर उसको ज़बरदस्त गरमा गरम किस करने लगी चुत में लंड को बराबर अंदर बाहर लेते हुए…. नीचे चुत और लंड के रस्स बह रहे थे और उपर दोनों एक दूसरे के मुहन के रस्स पे रहे थे.

बाहर रणजीत से सब देख कर रहा नहीं गया, वो भी मूठ मारने लगा मेनिका को आपने बाप से चुद़वते हुए देख कर…. मेनिका आपने प्रतीक पर ज़ियादा ज़ोरों से उछालती गयी लंड को आपने अंदर फील करते हुए और सिसकारी और हंफफने से उसस्के साँसें भी फूलने लगे, दिल की धड़कनें बढ़ने लगे और जिस्म पसीना पसीना हो गये था दोनों के….. फिर होना किया था मेनिका चिल्लाई;

“हाआअन्न्‍णणन् पीईईताआआआ जीिइईईईईईईईईईईई ईइसस्स्स्स्स्स्स्स्स्शह हाँ अंकल जीिइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई, बहूओत अकककककचहाआआआआआअ लग रहा हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई आआआआआआहह सस्स्स्स्स्स्स्शह”

और अचानक मेनिका शांत हुई आपने गाल को प्रतीक के छाती से लगाए हुए, प्रतीक की दिल की धड़कानों को सुनती गयी हनफफ्टे हुए…नीचे उसकी चुत ने पूरा पानी चोर्र दिया था साथ साथ प्रतीक के वीरया भी साथ मिल चुके थे मेनिका के पानी से…… प्रतीक ने ज़ोर से मेनिका को बाँहो में जाकर के “आआघघघघघघग…उउफफफफफफफफ्फ़” किए जब उसस्के लंड चुत से बाहर मेनिका के गान्ड के छेद पर रगढ़ रहा था वीरया चॉर्राते हुए…… फिर जल्दी से प्रतीक ने लंड को मेनिका के हातह में थमाया बाकी के वीरया के कत्रों को मेनिका से निकलवाने के लिए….. मेनिका मुस्कुरा रही थी आपने प्रतीक के लंड से बाकी के पानी निचोर्ते हुए…. एक एक कारट्रा निकला तो मेनिका ने खुद बा खुद आपने जीब को लंड के छेद पर हल्के से फेररा और नज़रों को उपर उठाके मुस्कुराते हुए प्रतीक के चेहरे में देखा, और एक लंबी सांड लेते हुए कहा, “लो अब मुरझाने लगा आप का ज़बरदस्त औज़ार अंकल जी….हिहिहीही” प्रतीक ने कहा , “इसी लंड से तुम भी पैदा हुई हो बहू…..” मेनिका ने होंठ को दाँत में दबाते हुए कहा; “हाँ अंकल जी, सही है….. पर आप ने मुझे मेरे पापा की याद दिला दिए….” जब मेनिका ने यह क्लाहा तो प्रतीक ने चाहुंकते हुए कहा;

“काइया मेरे लंड ने तुमको आपने अंकल की याद दिला दी? किया तुम ने कभी उसस्के लंड देखा है?” मेनिका ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया;

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“अरे नहीं पिताजी, मेरा मतलब वो नहीं था, मतलब यह के जब आप ने कहा इसी से मैं भी पैदा हुई हूँ, तो मैं ने सोचा मेरे अंकल ने भी इसी से मेरी मा के साथ करके मुझको पैदा किया है….. अजीब बात है ना अंकल जी, के जिसस चीज़ ने हुमको पैदा किया आज बड़े होकर हम उससी चीज़ को इतना पस्संद करते हेँ…. रिश्ता ही एसा है इस चीज़ से हमारा है ना अंकल जी?”….. प्रतीक मुस्कुराया और मेनिका को वापस उसकी पेंटी पहनाते हुए कहा; “सो तो है, अब मैं भी एसे ही एक चुत से निकला हूँ ना और इसी को पस्संद कराता हूँ बिलकूल सही कह रही हो बेटी अजीब बात है हमारा रिश्ता ही बना हुआ है इन्न चीज़ों से… एक मॅग्नेटिक अट्रॅक्षन जेसा है इनके बीच बहू…..” बाहर से रणजीत उन्ँके सारे बातें भी सुन रहा था….. रणजीत को यकीन नहीं आया जो मेनिका ने कहा आपने अंकल जी के बड़े में…. कुछ तो बात होगी मेनिका की आपने खुद के पिताजी के साथ जो उसकी याद आगाई प्रतीक के लंड हाथ में थामे हुए…… रणजीत सोच में डूब गया. “डाल में कुछ तो कला ज़रूर है ” है रणजीत ने कहा.

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