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शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 7 )
Date : June 20, 2015, 11:55:15 PM
Languages : Hindi
PageView : 00009975
Categoreies : Hindi Long Sex Stories
शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 9 )

Shaadishudaa Aurat Ki Kahani - Part 9

एक घंटे के बाद सब मामूल हो गया, रणजीत सब कुछ देखने के बाद आपने कमरे में चला गया और मेनिका भी प्रतीक को चोर्र कर चली गयी क्यूंके उसने तो आपना काम पूरा कर लिया था.

रणजीत आपने कमरे में बेड पर लेयटे सोच रहा था के उसस्के अंकल ने मेनिका से कर लिया तो मतलब के आज रात को मेनिका उसस्के कमरे में नहीं जाएगी. तो रणजीत ने सोचा के क्यूँ ना आज आपनी भाभी को आपने कमरे में लेकर आए?!! यूयेसेस ने आपने अंकल के सोने का इंतेज़ार किया.

फिर और एक घंटे के बाद पूरा घर बिलकूल अंधेरा हो गया था. एक भी बत्ती क़िस्सी भी कमरे में नहीं जल रही थी. सब सो रहे थे. आपने कमरे के दरवाज़े के पास खड़े होकर रणजीत सुनने की कोशिश कर रहा था के बाहर कॉरिडर में कोई आवाज़ तो नहीं सुनाई दे रहे हेँ. (इस पोस्ट पर 271 पेज 28 पर चेक करें स्केच में) … तो कुछ नहीं सुनाई दिया तो रणजीत कॉरिडर में निकला और अंधेरे में डीएवर को टटोलते हुए चल कर पहले आपने अंकल के कमरे के पास गया. वो जानना चाहता थे के कहीं मेनिका दोबारा उसस्के पास तो नहीं चली गयी…. कान लगा कर सुनना दरवाज़े पर आपने अंकल के रूम पर…. और आपने अंकल के खराते सुनकर उसको पता चल गया के मेनिका आपने कमरे में है. तो चल कर वापस आपनी भाभी के कमरे के तरफ गया वो. रणजीत नंगे पावं चल रहा था ताके कोई आवाज़ नहीं आए…..

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पहले मेनिका के कमरे के दरवाज़े से कान लगा कर सुनता है के अंदर से कोई आवाज़ तो नहीं सुनाई दे रहा, फिर बहुत ख़याल से दरवाज़े की हॅंडल को आहिस्ते से खोलने की कोशिश किया और दरवाज़ा लॉक नहीं था आसानी से खुल गया!! वो बहुत खुश हुआ. अंदर झाँका और धीरे से अंदर घुस्सा. उसका दिल बड़े ज़ोरों से धक धक किए जा रहा था, थूक भी नहीं था मुँह में सूखे गले को भीगाने के लिए, गला सूखा पड़ा था, थोड़ा बहुत काँप भी रहा था, बिलकूल एक चोर्र लग रहा था आपने ही घर में यूयेसेस वक़्त जेसे क़िस्सी और के घर में घुस्सा हो जब सब सो रहे हेँ!! थोड़ा दरराते हुए वो मेनिका के बिस्तर के तरफ बढ़ा. उसका बड़ा भाई कविता तो खराते मार रहा था, बेड के इस तरफ कविता ही सोया था यूयेसेस तरफ मेनिका थी, तो रणजीत को ज़ियादा चलना पड़ा बेड के यूयेसेस तरफ जाने के लिए, उसस्के पयर काँपने लगे, लगता था दिल धड़कना बंद हो जाएगा, साँसें तेज़ हो गये थे और उसको दरवाज़े से मेनिका तक पहुँचने में मीलों का सफ़र टेयै करना लग रहा था….. दो कदम चल कर नीचे बैठ गया…मेनिका को भी नींध लग गयी थी लगता था. खुद आपने दिल की धड़कानों को सुन पा रहा था वो…. ज़िंदगी में कभी भी एसे हालात से नहीं गुज़रा था वो…. सोच रहा था के कविता को उसस्के तेज़ साँसें या दिल की धड़कन जगा तो नहीं देगा….. उसस्के दोनों कानों में ‘फक फक’ के आवाज़ें अरहे थे…… खैर केसे भी करके हिम्मत जुटाया उसने और मेनिका तक रीच हुआ और उसस्के उपर से चादर को सरकया जो मेनिका ओढ़ चुकी थी….. नाइट लॅंप की धीमी रोशनी में पारी दिख रही थी उसकी मेनिका भाभी और नींध में तो और भी बहुत ज़ियादा खूब सूरात लग रही थी, बाँहो में कासके भरने को मॅन कर रहा था उससे मगर उसका हालत बहुत खराब था यूयेसेस वक़्त….. मेनिका की खूबसूराती को वहीं खड़े निहारने लगा वो, मेनिका बेहद सेक्सी दिख रही थी सोते हुए, उसकी चुचियाँ उपर नीचे उठ बैठ रहे थे उसस्के साँस लेने से, गहरी नींध में थी वो….

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रणजीत देखता गया मेनिका को फिर आहिस्ते से उसस्के एक बूब को छुआ उसने, बिना ब्रा के नाइटी में थी उसके बूब्स और नींध में नाइटी की एक स्ट्रॅप काँधे से नीचे बाज़ू पर सरक गयी थी… रणजीत ने हल्के से नाइटी को बूब से हटाया तो मेनिका की पूरी गोल बूब सामने आगाए जिस्सको रणजीत निहारने लगा…और हिमत करके यूयेसेस ने बूब को हल्के से होंठ लगाकर चूम भी लिया….. दर्द हो रहा था मेनिका को जगाने में….उसने सोचा उसको डिस्टर्ब ना करें, सोने दें और वापस लौट चलें……. अब रणजीत इतना दर्रा हुआ भी था के उसने ख़याल किया के मेनिका को वेसे देखने के बाद भी उसका लंड खड़ा नहीं हुआ था…… हेराँ हो गया और सोचने लगा यह किया बात हुई…. एसा तो नहीं होता कभी…इस लिए उसने मेनिका की दूसरी बूब को भी नाइटी से आज़ाद किया, मेनिका पीठ पर लेटी हुई थी जिसस से दोनों बूब मस्त उपर चत्ट के तरफ खड़े नज़र आ रहे थे और निपल कड़क मज़बूत खड़े भी थे…. रणजीत ने सब देखा और आपने लंड पर हाथ लेगया तो पाया के लंड भी सो रहा है…..मगर क्यूँ?!! उसको रांझ होने लगा अब…… परेशानी में उसने मेनिका के बूब को छुआ… सहलाया और दबाया जिसस से मेनिका चिहुनक कर उठ बैठी आपनी नाइटी को बूब के उपर करते हुए….. मेनिका बहुत हेराँ हो गयी, रणजीत को देखा, फिर आपने कमरे के दरवाज़े के तरफ देखा तब कविता को देखा फिर धीरे से रणजीत से कहा; “जाऊओ वापस जाओ पागल हो किया तुम! जाओ यहाँ से!” पर रणजीत जेसे भौक्लाया हुआ खड़ा था…. खुद आपने छाती पर आपना हाथ रखा और कहा; “भाबी एक प्राब्लम है प्लीज़ चलो बताता हूँ!!” मेनिका ने कहा; “नहीं अभी नहीं तुम जाओ यहाँ से वरना तुमको कभी आपने पास नहीं आने दूँगी समझे तुम!” रणजीत अब मेनिका की नहीं आपने लंड को लेकर परेशन था….. उसने धीरे से मेनिका के कान में कहा; “भाबी मैं ने तुमको, तुम्हारे चुचियों को बहुत देर से नंगा देख रहा हूँ पर मेरा खड़ा नहीं हो रहा, मुझे बहुत फिकर होने लगा, ड्ऱ लग रहा है…….” और मेनिका का हाथ पाकर कर आपने सीने से लगाया और कहा; “देखो मेरे दिल की धड़कानों को फील करो एसा होता है काइया…ई आम वेरी वरीड भाभी एसा क्यूँ हो रहा है??!!”

मेनिका ने जब उसस्के दिल की धड़कानों को इतने ज़ोरों से धड़कना फील किया तो उसको भी अजीब लगा और हेराँ रणजीत के चेहरे में देखते हुए कहा; “काइया हुआ? तुमने कोई बुरा सपना देखा काइया?” यह कहकर मेनिका बेड से उठकर रूम का लाइट को ऑन किया और रणजीत के चेहरे में देखने लगा. वो बहुत दर्रा हुआ दिख रहा था, तो मेनिका को बहुत हेयरानी हुई और दोबारा पूछा; “हुआ काइया? कहाँ थे तुम? सो रहे थे ना? कहीं गये थे किया तुम? बहोत वूथ तो नहीं देखा ना?”

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रणजीत ने ज़ोर से मेनिका को बाँहो में जकरते हुए टूटी हुई आवाज़ में कहा; “भाबी चलो ना मेरे साथ इससका इलाज तो करो मुझे किया हो रहा है समझ में नहीं आता मुझे!” मेनिका मूधकर कविता को सोते हुए देखती है और मुस्कुराकर रणजीत के हूतों पर आपने हाथ रख कर “ष्ह” कहती है…. और धीरे से फुसफुसाते हुए रणजीत से कहा; “अच्छा तुम चलो मैं पीछे आती हूँ!”

रणजीत के जान में जान आई और वो आपने कमरे में गया मेनिका की इंतेज़ार करते हुए….. मेनिका पहले टाय्लेट गयी और टाय्लेट से सीधे रणजीत के कमरे में गयी. रणजीत सिर्फ़ एक अंदरवेर में बेड पर लेटा इंतेज़ार कर रहा था…. मेनिका उसस्के तरफ बढ़ते हुए कहा, “तुम बहुत बुरे हो, मैं इतनी अच्छी नींध में सोई हुई थी सिर्फ़ यह सब करने के लिए मुझको जगाया…. कल का इंतेज़ार नहीं कर सकते थे तुम?! बहुत बदमाश हो गाए हो तुम आज कल!!”

रणजीत ने कहा;

“नहीं भाभी तुम समझ नहीं रही हो, देखो अब भी खड़ा नहीं हुआ है यह, तुमको इस कमरे में एंट्री लेते ही इस्सको राक की तरह खड़ा हो जाना चाहिए था, कोई प्राब्लम है मेरी समझ में नहीं आता किया हो रहा है….” मेनिका मुस्कुराइ और कहा; “अच्छा यह बात है अभी देखती हूँ केसे खड़ा नहीं होता यह पप्पू तेरा!!” तब रणजीत बोला;

“नहीं भाभी आप के बिना छुए इस्सको खड़ा होना चाहिए था…आप एक काम कीजिए आप यहाँ लेट जाइए मैं आप के पास खड़े होकर कुछ देर देखना चाहता हूँ के यह खड़ा होता है या नहीं…अगर तब भी नहीं हुआ तब आप इस्सको खाड़ा करना…..”

तो मेनिका हँससटे हुए रणजीत के बेड पर लेट जाती है…. रणजीत उसस्के पेयरों के तरफ जाता है और आपनी भाभी से कहता है;

“भाबी आपने एक पयर को ज़रा उपर उठाओ ना प्लीज़” जिसस जगह रणजीत खड़ा था, बेड के नीचे के तरफ याने मेनिका के पावं के तरफ, वहाँ से मेनिका पयर उठती तो उसस्के जांघों के बीच और मेनिका की पेंटी नज़र आते….. तो मेनिका मुस्कुराते हुए बोलती है;

“क्यूँ तंग क्यूँ उतोन, एसे कुछ नहीं दिखता किया तुमको? मेरी नाइटी इतनी छोटी है, जांघों के उपर है, इतनी पतली है के मेरे बूब्स और पेंटी दिख रहा है, तो और किया चाहिए तुझे ह्म?”

रणजीत आपने अंदरवेर के उपर हाथ फेरर्टे हुए कहता है;

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“बात को समझो ना भाभी उठाओ ना आपने एक तंग को प्लीज़….”

मेनिका चत्ट को उपर देखते हुए एक तंग को उपर उठती है जिसस से यूयेसेस के दोनों जांघों के बीच वाले नर्म, नाज़ुक , मुलायम हिस्से नज़र आते हेई और रणजीत घुटनों के बाल नीचे बैठता है और एक हाथ मेनिका की जाँघ पर फेरर्टा है और एक हाथ आपने लंड पर लेजता है अंदरवेर को निकल कर….. जून जून मेनिका के जांघों को उपर करेस कराता जाता था वेसे वेसे उसस्के लंड धीरे धीरे उपर उठ रहा था…जब उसका हाथ मेनिका की पेंटी को छुआ चुत के उपर तो उसका लंड एक दूं जाम के कड़क खड़ा हो गाया और खुशी से रणजीत खड़ा होकर मेनिका को आपने लंड दिखाते हुए एक छोटे बचे की तरह झूम कर कहता है;

“हो गयेा भाभी खड़ा हो गाया ई आम सो हॅपी…मुझे फिकर होने काग़ा था बाप रे!!”

मेनिका ने बचपाने आवाज़ में कहा;

“ना, नहीं देखूँगी मैं तुम बहुत शैठान हो गये हो सब बहाना था तुम्हारा…. मैं ना छुउंगी और ना चुस्सुंगई, तुम खुद आपने हाथ चलाओ मुझे देखते हुए मैं तुमको मूठ माराते हुए देखूँगी……”

तो रणजीत ने कहा;

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“ठीक है भाभी मैं तुमको देख कर मूठ माराता हूँ मगर आप मुझको आपने चुपे हुए उन्न हिस्सों को तो दिखाओ…” तो मेनिका ने आपने उंगलियों से हौले हौले आपने काँधे पर से नाइटी के स्ट्रॅप्स को नीचे सरकाने लगे, और बेड पर खड़ी हो गयी और नाइटी को नीचे गिररने दिया, अब वो सिर्फ़ आपनी पेंटी में खड़ी थी रणजीत के सामने…. और रणजीत आपनी भाभी के मस्त मस्त गोल गोल चुचियों को देखते हुए हाथ चलाने लगा आपने लंड पर, मेनिका की कमर, उसकी पेत, उसकी हर कर्व सब मस्त थे…प्रवींद्रा के नज़रें चारों तरफ उसस्के जिस्म पर नाच रहे थे और लगातार मूठ माराते जा रहा था…..

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