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शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 10 )
Date : June 20, 2015, 11:56:13 PM
Languages : Hindi
PageView : 000013020
Categoreies : Hindi Long Sex Stories
शादीशुदा औरात की कहानी - ( पार्ट 10 )

Shaadishudaa Aurat Ki Kahani - Part 10

बाप ने धीरे धीरे आपने जीब फेररणा शुरू किया मेनिका की घुटनो के नीचे से और आहिस्ते आहिस्ते उपर बढ़ता गया मेनिका की खूबसूरात सफेद और गुलाबी रंग के जांघों को निहाराते हुए और जीब फीराते हुए…. उसस्के जांघों से उसकी पेंटी तक का सफ़र चाटते हुए टेयै करने में काअफि वक़्त लगाया अंकल ने जबके मेनिका मर्री जा रही थी सिसकते हुए आपने बाप को उसकी चुत तक पहुँचे के लिए…. आपने एँखहू को बाँध किया मेनिका आपने पापा की च्छुवन को महसूस किए जा रही थी तारपते हुए, अंग्राऐियाँ लेते हुए और आहेईों भराते हुए… मेनिका उन्न दिनों को सोचने लगी थी, और एँखहू को बाँध करके उन्न्हीं दिनों में वावपास चली गयी थी जिन्न दिनों वो कुँवारी थी और उसस्के अंकल उसस्के साथ यह सब कराता था…मेनिका वोही फील किए जा रही थी के वो अब भी कुँवारी है और उसस्के पापा उसस्के जिस्म को वेसे ही चूम चाट रहा है जेसे वो किया कराता था अक्सर उसस्के शादी से सालों पहले…. आपने अंदर मेनिका ने यूयेसेस कुँवारी लड़की को महसूस किया जो वो पहली थी इस घर में शादी से पहले…. वो उन्न दिनों को जीने लगी थी इस पल में….

बाप तो लग रहा था एक भुखा शेयर है जिस्सको गोश्त मिल गया है बरसों बाद खाने के लिए…. जब मेनिका की पेंटी तक रीच हुआ, तो पेंटी को ही चुस्सने लगा उसने जो भीग गयी थी और बाआप ने आपनी बेटी की रस्स को चुस्सना और पीना शुरू किया पेंटी के उपर से ही, और आपने लाढ़ और थूक से पेंटी को और भी भिगो दिए उसने…. मेनिका की तारप और सिशकसे कमरा गूंझणे लगी थी…. फिर्र आपने दाँतों से अंकल ने आपनी बेटी की पेंटी को उतारना शुरू किया…. मेनिका यूयेसेस वक़्त आपने मुति में चादर को कासके भारके खींचने लगी…. तब मेनिका एँखहू को खोलकर आपने अंकल के चेहरे में उसस्के खुशी और धीरज का इंतेहा देखा जो आज आपनी बेटी को आपने बिस्तर पर लेटा कर पूरा कर रहा था एक मुदत के बाद. मेनिका को पता था के उसस्के पापा उसस्स्के लिए कितना भुखा था और मेनिका ने सोचा के उसकी कर्तव्या है आपने पापा को वो खुशी देना क्यूंके वहाँ आपने प्रतीक को इस से भी ज़ियादा खुशी दे चुकी थी. मेनिका की तारप बढ़ गयी जब उसस्के पापा ने उसस्के चुत की पंखुड़ियों को आपने जीब से अलग किया और ज्रर्ब को चुत की छेद के अंदर घुसेड़ा उसकी रस्स चाटने के लिए…. फिर उसकी रस्स को चुस्सते हुए उसकी गुलाबी छूत में अंकल आपना जीब ठुसटा गया जिसस से मेनिका से बर्दाश नहीं हुई और वो चीख पारी तारपते हुए एर आपने जिस्म को रेंगते हुए…..

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जल्द ही अंकल ने आपने कपड़े उतारे, मेनिका को भी नगी किया और बिस्तर पर मेनिका के उपर चढ़ा…. वो तब भी भुखा शेयर ही दिख रहा था जो आपनी फीमेल पर घुर्रा रहा था चढ़ के…. मेनिका उठ बैठी और बिना पूछे या कहे उसने आपने अंकल के लंड को हाथ से पकड़ा और अंकल तड़प उठा जेसे उसको एक दर्द हुआ जिसस दूं उसकी बेटी का हाथ ने उसस्के लंड को थामा…. वो एक खुशी भरा दर्द था…. इस उमर का हो गयेा था मगर कभी क़िस्सी ने उसस्के लंड को आपने मुँह में नहीं लिया था, आज बेटी द्वारा ज़िंदगी में पहली उसने आपने लंड को क़िस्सी के मुँह में जाते महसूस किया….. किया आलम था, किया लम्हा था उसकी ज़िंदगी की यह बयान करना नामुमकिन है….. मेनिका को शायद पता था के उसकी मा ने कभी लंड नहीं चुस्सा आपने ज़िंदगी में…. तो वो आपने अंकल को यह खुशी भरपूर देना चाहती थी…. उसने आहोस्टे से पहले आपने पापा के लंड को हाथ से सहलाया और धीरे धीरे आराम से लंड के उपरी हिस्से पर आपने जीब चलाया जिसस से बाप की तड़प की इंतेहा नहीं रही, उसस्के जिस्म काँप उठे और आपने बेटी के सर को दोनों हाथों में थाम कर आपने लंड को बेटी के मुँह में घुस्सटा देखने लगा आहें भराते हुए….. मेनिका ने आपने जीब फेररा लंड के उपर और उसको गोल गोल घुमाया लंड के छेद पर, और लंड को आपने मुँह में लिया मेनिका ने सर हिल्लाते हुए आपने मुँह के अंदर बाहर करने लगी और अंकल ने कमर हिल्लाते हुए पुश करने लगा…. उसको इतना मज़ा आया के बस एक पल में झड़ने को आया और थरथर काँपते हुए जिस्म से बाप घुर्राया, “बेटी मैं झड़ने वाला हूँ उफफफफ्फ़ किया क़यामत है किया कर दिया तुमने मुझे एसा पहले कभी नहीं हुआ मेरे साथ के इतनी जल्दी झाड़ ज़ाऊ… “आअगगज्गघघघघघघ्गगगगघह” उसको लंड को बाहर निकालने का मौका ही नहीं मिला उसस्के कम की पहला हुईस्सा सीधा मेनिका के हलाक के अंदर गया प्रेशर से…. और बाकी के वीरया को मेनिका ने बाहर थूका…. और आपने पापा के लंड को दोबारा चुस्सने लगी उसस्के झड़ने के बाद, बाप के जिस्म में जेसे करेंट दौड़ रहा था, वो झटके खाने लगे थे…. वो आपने टोस पर खड़ा हो गया जब उसस्के वीरया के अंतिम कतरे मेनिका के हलाक के अंदर ही ड्रॉप हुए…… बाप को इतनी खुशी मिली के उसस्स्कॉ लगा के ज़िंदगी में आज उसने पहली बार सेक्स किया है!!!

और आपने पापा के लंड को दोबारा चुस्सने लगी उसस्के झड़ने के बाद, बाप के जिस्म में जेसे करेंट दौड़ रहा था, वो झटके खाने लगे थे…. वो आपने टोस पर खड़ा हो गया जब उसस्के वीरया के अंतिम कतरे मेनिका के हलाक के अंदर ही ड्रॉप हुए…… बाप को इतनी खुशी मिली के उसस्स्कॉ लगा के ज़िंदगी में आज उसने पहली बार सेक्स किया है!!!

बाप ने मेनिका को आपने बगल में लेटया, ज़ोर से उसकोआ आपने सीने से चिपकाए दोनों नंगे हालत में और अंकल बोला;

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“बेटी तुम ने पापाको बहैओट ज़बरदस्त मज़ा दिया आज, मैं 57 का हो गया हूँ और आज तक क़िस्सी भी औरात ने मेरे लंड को आपने मुँह में नहीं लिया था, बहुत बहुत ही मज़ा और अजीब सुकून मिला मुझे मेरी दुलारी बिटिया तुमने पापा को इतना खुश किया के समझ में नहीं आता मैं केसे इज़हार करूँ…. शुकरिया मेरी लाडली बहुत शुकरिया तुमने आज पापा को हू खुशी दिया जो शायद कोई नहीं दे पाता कभिए.”

मेनिका आपने अंकल के छाती पर वहाँ के बाल पर आपने उंगलियों को फेररेते हुए पूछा;

“मा ने कभी नहीं था वेसा आप के साथ पापा?” पापा ने जवाब दिया; “नहीं मेरी जान, तुम्हारी मा बहुत पुराने ख़यालात वाले औरातों में से है तुमको तो पता ही है…. उसस्के साथ एक अच्छा किस जीब से करना भी मुश्किल है…. मैं तो सिर्फ़ कल्पना कराता था के कोई औरात मेरे लंड को चुस्स रही है, तुमने आज मेरा एक सपना पूरा कर दिया मेरी रबी बिटिया” मेनिका ने बचकानी जेसे एक शरारराती मुस्कान देते हुए आपने पापा की छाती पर किस किया, आपने जीब को छाती से उसस्के गले तक फेररा, उसस्के जिस्म के उपर छड़ी, क्यूँ के यूयेसेस वक़्त अंकल आपने पीठ पर लेट गया था, मेनिका ने आपने मुँह को बाप के मुँह से लगाया, होंठ से होंठ फिर से मिले और मेनिका ने आपनी जीब बाप के मुँह में डाला और दोनों एक दूसरे के रास पीने लगे और दोनों के जीब एक दूसरे के मुँह में घुल गये और पूरे 5 मिनिट्स तक वेसे रहे….

तब तक बाप का फिर से खड़ा हो गया…. तो उसने आपने हातेली को मेनिका के गान्ड पर दबाया, और फेररा, उसस्के दोनों टाँगों को फेयलया और आपने मोटे खड़े लंड को मेनिका की गीली चुत पर ज़रा सा रघड़ फिर आहिस्ते से उसकी चुत के अंदर घुसाया…. बिलकूल आराम से, आहिस्ते से बिना कोई जल्दी किए…. और क्यूँ के मेनिका उपर थी उन्न पर तो मेनिका ही हिल्लने लगी आपने कमर की हिल्लाते हुए और आपने गान्ड को उठक बैठक जेसे करते हुए…. आपने टोस पर प्रेशर देते हुए मेनिका उपर नीचे हो राह्िॉ थी आपने पापा के उपर, उसस्के पूरी नंगी जिस्म आपने पापा के जिस्म पर था उसका लंड मेनिका के अंदर और मेनिका का जिस्म उपर से नीचे बाप के जिस्म पर रगढ़ रहा था, उसकी चुचियाँ पापा के छाती पर रगढ़ रहे थे और बाकी जिस्म के हिस्से भी, जाँघ, पेत, सब बाप के जिस्म पर पसीने में भीगे रघदे जा रहे थे….

मेनिका के यूयेसेस तरह से उपर नीचे उसस्के जिस्म पर रगढ़ने से लंड उसकी चुत के अंदर बाहर हो रहा था…बाप तब तक कोई भी ज़ोर नहीं लगा रहे थे सब मेनिका ही कर रही थी आपने पापा के लिए…. पापा मेनिका की नंगी पीठ को सहला रहा था, तब उसने मेनिका के दोनों चुचियों को आपने मज़बूत हाथ में थामा, और आपने मुँह नझडीक किया फिर चुचियों एके क करके चुस्सने लगा…मेनिका के निप्पलेड को मुहन में लेकर चुस्स औसस्के अंकल ने जबके मेनिका लगातार आपने जिस्म को रगढ़ती जा रही थी और कसमस्सा रही थी सिसकारियों के साथ…. मेनिका ने आपने गार्डेन को उपर के तरफ उठा कर चाट को देख रही थी आपने आक्षन को बरकरार रखते हुए….. जब मेनिका ने गार्डेन को पीछे झटका तो उसस्के खुले गीस्सो सब के सब उसस्के पीठ पर फेयलिए गये और उसकी खूबसूराती को चार चाँद लगा दिए जिस्सको बावप निहाराते जा रहा था…. आज उसकी बेटी एक औरात बॅंकर उसको वो खुशी दे रहा था जो शायद ही कोई बेटी आपने बाप को देती हो….

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अब क्यूँ के मेनिका के गार्डेन उपर कर लिया तो अंकल की मुँह से चुचियाँ चूत गये तो बाप को भी गार्डेन को उजपर उतकले दोबारा चुचियों को चुस्सना पड़ा… मेनिका की हिल्लने की रफ़्तार धीरे धीरे बढ़तीओ गयी और वो बिलकूल गरम हो गयी थी और थोड़ी बहुत तड़पने भी लग गयी थी, हंफ़फ भी रही थी छोटी छोटी आवाज़ें आ रही थी उसस्के गले से जेसे, “ह्म्‍म्म्म आआहह सस्स्शहस्सस्स उूउउफफफफफफफ्फ़ ईीइसस्स्स्स्शह”… बाप के समझ में आगेया के बेटी को अब ज़रूरात है और वो झड़ने वाली होगी तो उसने भी आपने लंड को कमर उठा कर अंदर बाहर धक्का देने लगा…. मेनिका के हिल्लने के साथ साथ बाप भी धक्का देने लगा एक दूसरे के जिस्म सट्टे हुए थे, पसीने में भीगे हुए और ज़बरदस्त चुदाई हो रही थी बाप बेटी में.

और बाप उठ बैठा, मेनिका भी बैठ गयी, दोनों के टाँगें फेयलिए हुए, दोनों तरफ “व” के फॉर्म में और लंड मेनिका के चुत के अंदर ही था, तो बाप ने मेनिका के दोनों टाँगों कोज़ीयादा ओपन करते हुए, जेसे वो एक मोटरसाइकल या घोड़ी पर बैठी थी यूयेसेस वक़्त, और उससी बैठे हुए पोज़िशन में बाप आपने लंड केड हेक के फफ़्तार बढ़ता गया… मेनिका अब उठक बैठक ही कर रही थी आपने बाप के लंड के उपर जो उसकी चुत में घुसेडे हुए थे और लंड अंदर बाहर रफ़्तार से हो रहे थे…. बाप के हाथ मेनिका के कमर पर थे और मेनिका की बाहें बाप के गले में ज़ोर से जकरे हुए, उसकी चुचियाँ बाप के छाती से चिपके हुए जो उसस्के छाती के बाल से रगढ़ खा रहे थे जिसस से मेनिका को दुगना एग्ज़ाइट्मेंट हो रही थी; साथ साथ हू ज़ोरों से हंफफने लगी थी, बाप भी हाँफ रहा था और अचानक घुर्राटे हुए कहा; “अया अयाया मैं झड़ने वाला हूँ बेटा…..” मेनिका ने कहा; “सस्शह पापा बाहर निकालने की ज़रूरात नहीं मेरे अंदर ही झाड़ जाओ आप……” हनफफ्टे हुए बाप ने पूछा,
“काइया? सोचलो बेटा….!!” मेनिका ने दोबारा कहा; “हाँ पापा फिकर मत करो अंदर ही अजाओ, कोई बात नहीं मुझे पता है किया करना है आप अंदर ही अजाओ आराम से….” और इतना कहते ही वो भी सिसकते हुए कहा; “ह्म ईइसस्स्स्स्शह मैं भी पापा मैं भी उउफफफफफफफ्फ़ बहुत अच्छा लग रहा है पापा और अंदर डालो ना ज़ियादा अंदर जाने दो ना पापा…..आआआआहह” बाप ने भी “आआघघघ्गघह” करते हुए आपने सारे पानी को आपने बेटी की चुत की गहराई में चोर्रा… मेनिका ने आपने बाप की गरम वीरया को आपनी गहराई में उताराते महसूस किया.. दोनों ने बड़े ज़ोर से एक दूसरे को आपने बाँहो में जाकरा हुआ था हनफफ्टे हुए… दोनों के जिस्म एसे चिपके थे के लगता था कभी नहीं अलग होन्गे…. फिर दोनों क एक साथ एक लंबे साँस लिए और दोनों के होंठ एक दूसरे से मिले फिर दोनों एक दूसरे को किस करने लगे बीच बीच में साँस लेते हुए…. एक दूसरे के मुँह क रस्स का स्वाढ़ दोनों मज़े से ले रहे थे काफ़ी देर तक जब तक के बाप का लंड मेनिका के चुत के अंदर ही मुरझा गया……

फिर दोनों क एक साथ एक लंबे साँस लिए और दोनों के होंठ एक दूसरे से मिले फिर दोनों एक दूसरे को किस करने लगे बीच बीच में साँस लेते हुए…. एक दूसरे के मुँह क रस्स का स्वाढ़ दोनों मज़े से ले रहे थे काफ़ी देर तक जब तक के बाप का लंड मेनिका के चुत के अंदर ही मुरझा गया……

बाप बेटी पहली बार एक साथ सोए यूयेसेस रात को.

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अगले सूबह को बाप ने मेनिका के जिस्म को करेस किया जबके वो बिलकूल नंगी थी उसस्के बगल में बिस्तर पर. नंगा वो भी था, क्यूके दोनों सेक्स के बाद नींध के अघोष में खो गये थे रात को. अंकल फिर से चोदना चाहता था मेनिका को सूबह सूबह, मगर मेनिका ने रात के लिए बचा के रखने के लिए कहा. मेनिका ने बाप को किस किया और उठकर चली गयी.

दूसरे तरफ उधर रणजीत मेनिका को बहुत मिस कर रहा था, उसको मेनिका को देखने का, यूयेसेस से बात करने का और उसको आपने पास महसूस करने का मॅन कर रहा था. प्रतीक भी आपनी चहिती बहू को मिस कर रहा था, ख़ास्स कर रातों को बिस्तर पर. सिर्फ़ एक दिन गुज़रा था मेनिका के बिना यूयेसेस घर में और सब उसकी कमी को महसूस कर रहे थे. रणजीत सिर्फ़ मेनिका उसस्के गाव में क़िस्सी से चुद़वते हुए इमॅजिन कर रहा था. उसको यकीन था के जब मेनिका वापस आएगी तो उसको बहुत कुछ बतने को होगी. मगर किया मेनिका आपने आप सब कुछ बताएगी? मेनिका ने तो उसको खुद रणजीत के बाप से सेक्स के बड़े में कुछ नहीं बताया था रणजीत को जब तक उसको खुद पता ना चला…. रणजीत के मॅन में एक बात बार बार घूम फिर कर गूँझ रहा था “आप ने मुझको मेरे पापा की याद दिला दी” जो मेनिका ने आपने प्रतीक से कहा था और रणजीत ने सुना था….यह बात रणजीत के दिमघ में बैठ गया था यूयेसेस दिन से. और रणजीत को पक्का यकीन था के मेनिका को आपने अंकल के साथ कुछ ना कुछ लेना देना है हटके!!

आपने गाव में उधर मेनिका बिलकूल आज़ाद थी, उसस्के पापा बाहर चला गया था. घर में वो बिलकूल अकेली थी और वो भी रणजीत को याद कर रही थी क्यूँ के दिन भर घर में उससी के सात रहती थी अक्सर ससुराल में. मेनिका को पता था के रणजीत भी उसको याद कर रहा होगा ख़ास कर हॉट बेड पर गुज़रे इंटरकोर्स को. पर इधर मेनिका तो आपने पापा से खुद की जिस्म को आराम दे रही थी मगर उधर रणजीत के लिए कोई नहीं थी उसको खुश करने के लिए, एसा मेनिका सोचने लगी…. फिर सोचने लगी किया रणजीत क़िस्सी और लड़की या औरात के पास गया होगा? मेनिका को जलन फील हुआ और वो नहीं चाहती थी के रणजीत क़िस्सी और औरात के पास जाए. फिर मेनिका ने खुद को तस्सल्ली दिया यह सोच कर के यूयेसेस गाव में रणजीत को कोई औरात या लड़की नहीं मिलेगी जो उसको उसस्के जेसा खुशी दे सके.

अब मेनिका की गाव में, उसस्के भाई जो यूयेसेस से मिलने आया था एक दिन पहले, उसने आपने दूसरे भाई को खबार भेज दिया के मेनिका आई हुई है पापा के यहाँ. वो कोई 1 किलोमीटर की दूरीए पर रहता था उससी गाव में. मेनिका के दो बड़े भाइयों के उमर 42 और 38 थे. जो एक दिन पहले आया था वो प्रदीप था 38 साल का. और सबसे बड़ा भाई है सुनील जो 42 साल का है. सुनील की एक बेटी है ** साल की. प्रदीप की कोई औलाद नहीं है.

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तो सुनील मेनिका से मिलने आया जब उसको खबर मिली के वो आई हुई है. दोनों भाई बहें गले मिले, बात चीत किए और सुनील ने यूयेसेस से कहा; “तुम बहुत ज़ियादा खूबसूरात हो गयी हो मेनिका शादी के बाद!! केसे लड़कियाँ शादी के बाद आपने अंकल के घर चॉर्र्ने पर इतनी ज़ियादा खूबसूरात हो जाते हेँ?” मेनिका ने जवाब में कहा;

“वो शायद इस लिए के शादी के बाद लड़कियों को बहुत ज़ियादा प्यार मिलते हेँ ससुराल में जो अंकल के घर में नहीं मिलता”

और सुनील ने मेनिका को आपने घर चलने को कहा. मेनिका को आपने पापा को बठाना था के वो सुनील भाई के घर जा रही है… तो सुनील ने मेनिका को आपनी गाड़ी में ले लिया और जाते वक़्त रास्ते में आपने अंकल से कह दिया के वो मेनिका को आपने घर लेजा रहा है और शाम को उससे वापस उसस्के घर लौटा देगा.

सुनील आपने घर पहुँचा. कोई भी नहीं था उसस्के यहाँ क्यूंके उसकी वाइफ टीचर थी और उसकी बेटी स्कूल गयी हुई थी. जेसे घर के अंदर दाखिल हुए, सुनील ने मेनिका को बाँहो में भर लिया और सीने से लगाते हुए कहा; “मेरी प्यारी गुडया बहना, मैं ने कभी भी नहीं सोचा था के तू इतनी खूबसूरात औरात बन जाएगी री!! तू बहुत ही हॉट और सेक्सी लग रही है पता है तुझे?” और मेनिका ने उसका लंड तन्ना हुआ महसूस किया आपने जांघों के उपर उसस्के बाँहो में थी तो. मेनिका ने खुद से मॅन में कहा; “ओह नो भाई भी?! इससने तो कभी भी एसा नहीं सोचा या कुछ किया था कभी मेरे साथ?!!” मेनिका आपने भाई के बाँहो से निकलते हुए कहा; “भाई, किया कर रहे हो? मैं आप की छोटी बहें हूँ ना?!” और सुनील ने जवाब दिया;

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“देखो मेनिका, अब तुम एक मुकम्मल औरात हो गयी हो और तुमको अब सब पता है के सेक्स किया होता है, वाघहैरा… – जेसे मैं ने तुमको पापा के घर में देखा उससी वक़्त मैं ने सोच लिया के तुमसे सेक्स करूँगा यहाँ आपने घर में लाकर क्यूंके अब तुमको पता है के एक मर्द को बेड पर लेना किया होता है…इसी लिए तुमको यहाँ लेकर आया हूँ मेनिका रानी…. तुम बेहद सेक्सी लग रही हो और लगता है तुमको सेक्स की ज़रूरात है इस वक़्त…. एसे मौके बार बार नहीं आते मेरी हसीन गुडया…. आपने इस बड़े भाई को तुम्हें चखने का एक मौका डेडॉ मेरी गुडया रानी…. शायद एसा मौका मुझको फिर कभी नहीं मिले!!”

आपने बड़े भाई के इन्न बातों को सुनकर मेनिका के जिस्म काँप उठी…. एक सिरहन सी हुई उसस्के अंग अंग में. मेनिका ने सोचा वो तो एक इन्सेस्ट की गुडया बन गयी अब. उसस्के जिस्म में एक गर्मी सी चाय और उतेज़ीना से जिस्म सिहर गयी आपने बड़े भाई के साथ जिस्मानी तालुकात के बड़े में सोचकर. और तब मेनिका आपने बड़े भाई के पेंट के उपर जहाँ लंड होता है वहाँ देखने लगी तो पाया के पेंट वहाँ फुल्ला हुआ था मतलब भाई का खड़ा हो गया था बिलकूल…. तो मेनिका ने यूयेसेस से पूछा;

“भाई एक बात बताओ, आज से पहले आप ने मुझको लेकर कभी एसा सोचा था?”

सुनील भाई ने जवाब दिया;

आप अपने बिचार यहाँ भेजें।

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